ghusse se uth chale ho to daaman ko jhaad kar | ग़ुस्से से उठ चले हो तो दामन को झाड़ कर

  - Meer Taqi Meer
ग़ुस्सेसेउठचलेहोतोदामनकोझाड़कर
जातेरहेंगेहमभीगरेबानफाड़कर
दिलवोनगरनहींकिफिरआबादहोसके
पछताओगेसुनोहोयेबस्तीउजाड़कर
यारबरह-ए-तलबमेंकोईकबतलकफिरे
तस्कीनदेकिबैठरहूँपाँवगाड़कर
मंज़ूरहोपासहमारातोहैफ़है
आएहैंआजदूरसेहमतुझकोताड़कर
ग़ालिबकिदेवेक़ुव्वत-ए-दिलइसज़ईफ़को
तिनकेकोजोदिखावेहैपलमेंपहाड़कर
निकलेंगेकामदिलकेकुछअबअहल-ए-रीशसे
कुछढेरकरचुकेहैंयेआगेउखाड़कर
उसफ़नकेपहलवानोंसेकश्तीरहीहै'मीर'
बहुतोंकोहमनेज़ेरकियाहैपछाड़कर
  - Meer Taqi Meer
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