ghalib ki ye dil-khasta shab-e-hijr men mar jaa.e | ग़ालिब कि ये दिल-ख़स्ता शब-ए-हिज्र में मर जाए

  - Meer Taqi Meer
ग़ालिबकियेदिल-ख़स्ताशब-ए-हिज्रमेंमरजाए
येरातनहींवोजोकहानीमेंगुज़रजाए
हैतुर्फ़ामुफ़त्तिन-निगहउसआइना-रूकी
इकपलमेंकरेसैंकड़ोंख़ूँऔरमुकरजाए
नेबुत-कदाहैमंज़िल-ए-मक़्सूदका'बा
जोकोईतलाशीहोतिराआहकिधरजाए
हरसुब्हतोख़ुर्शीदतिरेमुँहपेचढ़ेहै
ऐसाहोयेसादाकहींजीसेउतरजाए
याक़ूतकोईउनकोकहेहैकोईगुल-बर्ग
टुकहोंटहिलातूभीकिइकबातठहरजाए
हमताज़ाशहीदोंकोदेखनेनाज़ाँ
दामनकीतिरीज़हकहींलोहूमेंभरजाए
गिर्येकोमिरेदेखटुकइकशहरकेबाहर
इकसत्हहैपानीकाजहाँतककिनज़रजाए
मतबैठबहुतइश्क़केआज़ुर्दादिलोंमें
नालाकसूमज़लूमकातासीरकरजाए
इसवरतेसेतख़्ताजोकोईपहुँचेकिनारे
तो'मीर'वतनमेरेभीशायदयेख़बरजाए
  - Meer Taqi Meer
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