dil jo zer-e-ghubaar akshar tha | दिल जो ज़ेर-ए-ग़ुबार अक्सर था

  - Meer Taqi Meer
दिलजोज़ेर-ए-ग़ुबारअक्सरथा
कुछमिज़ाजइनदिनोंमुकद्दरथा
इसपेतकियाकियातोथालेकिन
रात-दिनहमथेऔरबिस्तरथा
सरसरीतुमजहाँसेगुज़रे
वर्नाहरजाजहान-ए-दीगरथा
दिलकीकुछक़दरकरतेरहियोतुम
येहमाराभीनाज़-परवरथा
बा'दयकउम्रजोहुआमा'लूम
दिलउसआईना-रूकापत्थरथा
बारेसज्दाअदाकियातह-ए-तेग़
कबसेयेबोझमेरेसरपरथा
क्यूँँअब्र-ए-सियहसफ़ेदहवा
जबतलकअहद-ए-दीदा-ए-तरथा
अबख़राबाहुआजहानाबाद
वर्नाहरइकक़दमपेयाँघरथा
बे-ज़रीकाकरगिलाग़ाफ़िल
रहतसल्लीकियूँँमुक़द्दरथा
इतनेमुनइ'मजहानमेंगुज़रे
वक़्तरेहलतकेकिसकनेज़रथा
साहिब-ए-जाह-ओ-शौकत-ओ-इक़बाल
इकअज़ाँजुमलाअबसिकंदरथा
थीयेसबकाएनातज़ेर-ए-नगीं
साथमोर-ओ-मलख़सालश्करथा
लाल-ओ-याक़ूतहमज़र-ओ-गौहर
चाहिएजिसक़दरमुयस्सरथा
आख़िर-ए-कारजबजहाँसेगया
हाथख़ालीकफ़नसेबाहरथा
ऐबतूल-ए-कलाममतकरियो
क्याकरूँँमैंसुख़नसेख़ूगरथा
ख़ुशरहाजबतलकरहाजीता
'मीर'मा'लूमहैक़लंदरथा
  - Meer Taqi Meer
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