dard-o-andoh men thehra jo raha main hi hooñ | दर्द-ओ-अंदोह में ठहरा जो रहा मैं ही हूँ

  - Meer Taqi Meer
दर्द-ओ-अंदोहमेंठहराजोरहामैंहीहूँ
रंग-रूजिसकेकभूमुँहचढ़ामैंहीहूँ
जिसपेकरतेहोसदाजौर-ओ-जफ़ामैंहीहूँ
फिरभीजिसकोहैगुमाँतुमसेवफ़ामेंहीहूँ
बदकहामैंनेरक़ीबोंकोतोतक़्सीरहुई
क्यूँँहैबख़्शोभीभलासबमेंबुरामैंहीहूँ
अपनेकूचेमेंफ़ुग़ाँजिसकीसुनोहोहररात
वोजिगर-ए-सोख़्तासीना-जलामैंहीहूँ
ख़ारकोजिननेलड़ीमोतीकीकरदिखलाया
उसबयाबानमेंवोआबला-पामैंहीहूँ
लुत्फ़आनेकाहैक्याबसनहींअबताब-ए-जफ़ा
इतनाआलमहैभराजाओक्यामैंहीहूँ
रुककेजीएकजहाँदूसरेआलमकोगया
तन-ए-तन्हातिरेग़ममेंहुआमैंहीहूँ
इसअदाकोतोटकइकसैरकरइंसाफ़करो
वोबुराहैगाभलादोस्तोयामैंहीहूँ
मैंयेकहताथाकिदिलजननेलियाकौनहैवो
यक-ब-यकबोलउठाउसतरफ़मैंहीहूँ
जबकहामैंनेकितूहीहैतोफिरकहनेलगा
क्याकरेगातूमिरादेखूँतोजामैंहीहूँ
सुनतेहीहंसकेटकइकसोचियोक्यातूहीथा
जिननेशबरोकेसबअहवालकहामैंहीहूँ
'मीर'आवारा-ए-आलमजोसुनाहैतूने
ख़ाक-आलूदावोबाद-ए-सबामैंहीहूँ
कासा-ए-सरकोलिएमाँगतादीदारफिरे
'मीर'वोजानसेबेज़ारगदामैंहीहूँ
  - Meer Taqi Meer
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