बग़ैरदिलकियेक़ीमतहैसारेआलमकी
कसोसेकामनहींरखतीजिंसआदमकी
कोईहोमहरमशोख़ीतिरातोमेंपूछूँ
किबज़्म-ए-ऐशजहाँक्यासमझकेबरहमकी
हमेंतोबाग़कीतकलीफ़सेमुआ'फ़रखो
किसैर-ओ-गशतनहींरस्मअहल-ए-मातमकी
तनिकतोलुत्फ़सेकुछकहकिजाँ-ब-लबहूँमैं
रहीहैबातमिरीजानअबकोईदमकी
गुज़रनेकोतोकज-ओ-वाकजअपनीगुज़रेहै
जफ़ाजोउननेबहुतकीतोकुछवफ़ाकमकी
घिरेहैंदर्द-ओ-अलममेंफ़िराक़केऐसे
किसुब्ह-ए-ईदभीयाँशामहैमहरमकी
क़फ़समें'मीर'नहींजोशदाग़सीनेपर
हवसनिकालीहैहमनेभीगुलकेमौसमकी