baghair dil ki ye qeemat hai saare aalam ki | बग़ैर दिल कि ये क़ीमत है सारे आलम की

  - Meer Taqi Meer
बग़ैरदिलकियेक़ीमतहैसारेआलमकी
कसोसेकामनहींरखतीजिंसआदमकी
कोईहोमहरमशोख़ीतिरातोमेंपूछूँ
किबज़्म-ए-ऐशजहाँक्यासमझकेबरहमकी
हमेंतोबाग़कीतकलीफ़सेमुआ'फ़रखो
किसैर-ओ-गशतनहींरस्मअहल-ए-मातमकी
तनिकतोलुत्फ़सेकुछकहकिजाँ-ब-लबहूँमैं
रहीहैबातमिरीजानअबकोईदमकी
गुज़रनेकोतोकज-ओ-वाकजअपनीगुज़रेहै
जफ़ाजोउननेबहुतकीतोकुछवफ़ाकमकी
घिरेहैंदर्द-ओ-अलममेंफ़िराक़केऐसे
किसुब्ह-ए-ईदभीयाँशामहैमहरमकी
क़फ़समें'मीर'नहींजोशदाग़सीनेपर
हवसनिकालीहैहमनेभीगुलकेमौसमकी
  - Meer Taqi Meer
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