आओकभूतोपासहमारेभीनाज़से
करनासुलूकख़ूबहैअहल-ए-नियाज़से
फिरतेहोक्यादरख़्तोंकेसाएमेंदूरदूर
करलोमुवाफ़क़तकिसूबेबर्ग-ओ-साज़से
हिज्राँमेंउसकेज़िंदगीकरनाभलानथा
कोताहीजोनहोवेयेउम्र-ए-दराज़से
मानिंद-ए-सुब्हाउक़देनदिलकेकभूखुले
जीअपनाक्यूँँकिउचटेनरोज़ेनमाज़से
करताहैछेदछेदहमाराजिगरतमाम
वोदेखनातिरामिज़ा-ए-नीम-बाज़से
दिलपरहोइख़्तियारतोहरगिज़नकरिएइश्क़
परहेज़करिएइसमरज़-ए-जाँ-गुदाज़से
आगेबिछाकेनताकोलातेथेतेग़ओतश्त
करतेथेयानीख़ूनतोइकइम्तियाज़से
मानेहोंक्यूँँकिगिर्या-ए-ख़ूनींकेइश्क़में
हैरब्त-ए-ख़ासचश्मकोइफ़शा-ए-राज़से
शायदशराब-ख़ानेमेंशबकोरहेथे'मीर'
खेलेथाएकमुग़बचामोहर-ए-नमाज़से