tujhe KHabar nahin hai kyuuñ ye imtihaan hai zeest men | तुझे ख़बर नहीं है क्यूँ ये इम्तिहाँ है ज़ीस्त में

  - Meenakshi Masoom
तुझेख़बरनहींहैक्यूँयेइम्तिहाँहैज़ीस्तमें
किफ़ासलासातेरेमेरेदरमियाँहैज़ीस्तमें
जहाँजहाँतेरेक़दममेरेहमनवारहे
वहाँवहाँलिखाहुआइकइकनिशाँहैज़ीस्तमें
तूकररहाहैइंतिज़ारजिसकारातदिनयहाँ
वोशख़्सहीतेरेलिएतोबदगुमाँहैज़ीस्तमें
सजारहेथेख़्वाबहमभीएकघरकेवास्ते
जुदाहुएतोफिरउजाड़सामकाँहैज़ीस्तमें
तमामरातनींदमेंतुम्हींसेगुफ़्तगूरही
तुम्हींहोसाथतोहसीनयेजहाँहैज़ीस्तमें
कभीतोलौटबुलंदियोंसेपासमेरेतू
खुलामेरेलिएकोईआसमाँहैज़ीस्तमें
नसीबमेंलिखामेरेजोहैउसेमैंक्याकहूँ
दु'आहैवस्लकीतोहिज्रमेहरबाँहैज़ीस्तमें
  - Meenakshi Masoom
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