ye daulat kyuuñ sadaa zardaar ke hisse men rahtii hai | ये दौलत क्यूँ सदा ज़रदार के हिस्से में रहती है

  - Meena Bhatt
येदौलतक्यूँसदाज़रदारकेहिस्सेमेंरहतीहै
ग़रीबीक्यूँभलाहमजैसोंकेखातेमेंरहतीहै
वोचाँदीमेंरहतीहैहीसोनेमेंरहतीहै
ग़रीबीक्यूँभलाहमजैसोंकेखातेमेंरहतीहै
शराफ़तनामकीभीआजकलढूँढेनहींमिलती
यहाँतहज़ीबसारीहीफ़क़तशजरेमेंरहतीहै
अज़लसेप्यारकादुश्मनरहाहैयेज़मानाक्यूँ
मोहब्बतभीहमेशाइसलिएचर्चेमेंरहतीहै
बहकतीहैजवानीमुफ़्तमेंदेतीहैजाँअपनी
ख़राबीबसयहीतोइश्क़केनश्शेमेंरहतीहै
कभीघबरातूनाकामियोंसेज़ीस्तकीअपनी
छुपीयेक़ामयाबीतोइसीमलबेमेंरहतीहै
कहाँमहफ़ूजहैकोईयहाँदहशतकेआलममें
हमारीज़ीस्तहरपलक्यूँयहाँख़तरेमेंरहतीहै
  - Meena Bhatt
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