शम्अ जैसे जला नहीं करते

  - Meena Bhatt
शम्अजैसेजलानहींकरते
रोज़हमरतजगानहींकरते
अश्कबनकेरहेवोआँखोंमें
ज़िदमेंलेकिनबहानहींकरते
राहदुश्वारहैमोहब्बतकी
ख़ैरहमतोगिलानहींकरते
हमबिछातेबिसातहैंलेकिन
चालकोईचलानहींकरते
तोड़देतेहैंसबत'अल्लुक़हम
दिलमेंरंजिशरखानहींकरते
ज़ब्तकरतेज़मानेभरकेग़म
घरकोजोमय-क़दानहींकरते
बसगिनातेहोपापमेरेतुम
छूकेक्यूँपारसानहींकरते
राज़दिलमेंनिहाँजोतेरेहै
जाम-ए-जमसेछुपानहींकरते
कहते'मीना'तेरेलिएहीग़ज़ल
महफ़िलोंमेंकहानहींकरते
  - Meena Bhatt
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