क़ैद हों जिस

  - Meena Bhatt
क़ैदहोंजिस
मेंपरिंदेमैंवोपिंजरारहूँ
ओढ़करचेहरेपेकोईभीमुखौटारहूँ
चाहेसागरसाबड़ाऔरकुशादारहूँ
बसतबाहीकाकिसीकीभीमैंजरियारहूँ
भीड़पीछेचलेऐसारहेकिरदारअपना
मेरेमालिकमैंकिसीभीड़काहिस्सारहूँ
ख़ुदाइश्क़मेरातूहीमुकम्मलकरना
प्यारकाकोईअधूरासामैंक़िस्सारहूँ
दोनोंहाथोंसेलुटाऊँमुझेइतनादेदे
होकेमुहताजलिएहाथमेंकासारहूँ
राजदिलपरकरूँँमैंसारेज़मानेकेही
मैंकिसीकीभीरियासतकापियादारहूँँ
भूलजाऊँकहींजगकोतेरीचाहतमें
तेरीज़ुल्फ़ोंमेंसनमइतनाभीउलझारहूँँ
ज़ीनत-ए-अहलेसुख़नमीनाबनेहैयेदु'आ
बनकेमिसराकभीमैंकोईतोतन्हारहूँ
  - Meena Bhatt
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