kitna mushkil hai kabhi gham ka fasana kehna | कितना मुश्किल है कभी ग़म का फ़साना कहना

  - Meena Bhatt
कितनामुश्किलहैकभीग़मकाफ़सानाकहना
अश्कबहतेहोंमगरउनकोभीझूठाकहना
यादआताहैमुझेअबभीवोगुज़राबचपन
मीठेलफ़्ज़ोंसेमुझेमाँकावोलालाकहना
मारडालेंगीयेता'रीफ़ेंभीझूठीउनकी
घरकीरौनक़तोकभीचाँदसिताराकहना
ख़ूबवाक़िफ़हूँमैंभीप्यारमुहब्बतसेअब
इतनीमिलतीदग़ाकोईनहींअपनाकहना
इसतरफ़हमथेउधरथायेज़मानाज़ालिम
भूलनामतकभीयहप्यारकाक़िस्साकहना
बोझरिश्तोंकालिएसरपेफिराकरतेहैं
मरचुकेहमहैंकभीकेनहींज़िंदाकहना
लिक्खे'मीना'नेभीअश्कोंसेतुम्हारीख़ातिर
उसकेहरशे'रकोअबज़ीस्तकाहिस्साकहना
  - Meena Bhatt
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