dil ke jalne pe dhuaan ho ye zaroori to nahin | दिल के जलने पे धुआँ हो ये ज़रूरी तो नहीं

  - Meena Bhatt
दिलकेजलनेपेधुआँहोयेज़रूरीतोनहीं
दर्दयेसबपेअयाँहोयेज़रूरीतोनहीं
सोचकरबसयहीचुपचापसहेहमनेसितम
ज़ुल्मकाक़िस्साबयाँहोयेज़रूरीतोनहीं
कुछतोएहसासकरोदर्द-ए-शजरकातुमभी
उनकेमुँहमेंभीज़बाँहोयेज़रूरीतोनहीं
गुलशन-ए-इश्क़पेमैंदाँवलगाकरदेखूँ
मेरेहिस्सेमेंख़िज़ाँहोयेज़रूरीतोनहीं
रातरंगीनहोख़ुशरंगहोमौसमकामिज़ाज
दिलमगरउनकाजवाँहोयेज़रूरीतोनहीं
ज़लज़लेमहलोंकोभीरेतकियाकरतेहैं
टूटाअपनाहीमकाँहोयेज़रूरीतोनहीं
रबकेहरफ़ैसलेपरसरकोझुकायामीना
सुनतामेरीवोयहाँहोयेज़रूरीतोनहीं
  - Meena Bhatt
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