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Meem Maroof Ashraf
sabab jab bhi udaasi ka kisi ne ham se poocha hai
sabab jab bhi udaasi ka kisi ne ham se poocha hai | सबब जब भी उदासी का किसी ने हम से पूछा है
- Meem Maroof Ashraf
सबब
जब
भी
उदासी
का
किसी
ने
हम
से
पूछा
है
ज़ुबा
पर
बे-तकल्लुफ़
फिर
तिरा
ही
नाम
आया
है
नहीं
आता
कभी
फ़न्न-ए-सुख़न
गर
साथ
वो
होता
बिछड़ना
यार
का
'अशरफ़'
के
कितना
काम
आया
है
- Meem Maroof Ashraf
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सीधा-साधा
डाकिया
जादू
करे
महान
एक
ही
थैले
में
भरे
आँसू
और
मुस्कान
Nida Fazli
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ईद
ख़ुशियों
का
दिन
सही
लेकिन
इक
उदासी
भी
साथ
लाती
है
ज़ख़्म
उभरते
हैं
जाने
कब
कब
के
जाने
किस
किस
की
याद
आती
है
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Farhat Ehsaas
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हम
तो
बचपन
में
भी
अकेले
थे
सिर्फ़
दिल
की
गली
में
खेले
थे
Javed Akhtar
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शोर
की
इस
भीड़
में
ख़ामोश
तन्हाई
सी
तुम
ज़िन्दगी
है
धूप
तो
मद-मस्त
पुर्वाई
सी
तुम
चाहे
महफ़िल
में
रहूँ
चाहे
अकेले
में
रहूँ
गूँजती
रहती
हो
मुझ
में
शोख़
शहनाई
सी
तुम
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Kunwar Bechain
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मैं
चाहता
था
मुझ
सेे
बिछड़
कर
वो
ख़ुश
रहे
लेकिन
वो
ख़ुश
हुआ
तो
बड़ा
दुख
हुआ
मुझे
Umair Najmi
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क्या
दुख
है
समुंदर
को
बता
भी
नहीं
सकता
आँसू
की
तरह
आँख
तक
आ
भी
नहीं
सकता
तू
छोड़
रहा
है
तो
ख़ता
इस
में
तेरी
क्या
हर
शख़्स
मेरा
साथ
निभा
भी
नहीं
सकता
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Waseem Barelvi
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दुख
तो
बहुत
मिले
हैं
मोहब्बत
नहीं
मिली
यानी
कि
जिस्म
मिल
गया
औरत
नहीं
मिली
मुझको
पिता
की
आँख
के
आँसू
तो
मिल
गए
मुझको
पिता
से
ज़ब्त
की
आदत
नहीं
मिली
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Abhishar Geeta Shukla
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शाम
भी
थी
धुआँ
धुआँ
हुस्न
भी
था
उदास
उदास
दिल
को
कई
कहानियाँ
याद
सी
आ
के
रह
गईं
Firaq Gorakhpuri
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पहले
ये
काम
बड़े
प्यार
से
माँ
करती
थी
अब
हमें
धूप
जगाती
है
तो
दुख
होता
है
Munawwar Rana
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ख़ुदा
को
मान
कि
तुझ
लब
के
चूमने
के
सिवा
कोई
इलाज
नहीं
आज
की
उदासी
का
Zafar Iqbal
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जान-ए-जाँ
हम
तुझे
तसव्वुर
में
अपने
सीने
लगा
के
सोते
हैं
Meem Maroof Ashraf
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हम
किस
की
मोहब्बत
का
भला
ज़ो'म
दिखाएँ
हम
को
तो
कोई
चाहने
वाला
भी
नहीं
है
Meem Maroof Ashraf
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ख़ाक
को
ख़ाक
में
मिलाते
हुए
अच्छा
लगता
है
ज़ख़्म
खाते
हुए
ज़िक्र
होता
है
दोस्तों
में
तिरा
सिगरेटों
का
धुआँ
उड़ाते
हुए
भूल
जाता
है
बे-वफ़ाई
को
अपने
औसाफ़
वो
गिनाते
हुए
कौन
साँसें
तिरी
बढ़ाता
है
जिस्म
पर
उँगलियाँ
फिराते
हुए
तुझ
से
तो
यूँँ
ही
कह
रहा
था
बस
अच्छी
लगती
है
खिलखिलाते
हुए
यारों
जा
कर
के
उस
को
समझाओ
खो
न
दे
मुझ
को
आज़माते
हुए
हम
को
हरगिज़
न
ख़ुश
समझ
लेना
गरचे
रहते
हैं
मुस्कुराते
हुए
साम'ईं
वाह
वाह
करते
रहे
रो
पड़ा
मैं
ग़ज़ल
सुनाते
हुए
उस
का
जाना
अजीब
था
'क़ैसर'
ख़ुद
भी
रोया
मुझे
रुलाते
हुए
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Meem Maroof Ashraf
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दूर
जाना
है
अगर
मुझ
से
तो
जा
सकते
हो
हाँ
करो
वा'दा
कभी
याद
नहीं
आओगे
Meem Maroof Ashraf
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ज़िक्र
होता
है
दोस्तों
में
तिरा
सिगरेटों
का
धुआँ
उड़ाते
हुए
Meem Maroof Ashraf
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