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Meem Maroof Ashraf
mujh se kahti hai aaj tum sha'ir
mujh se kahti hai aaj tum sha'ir | मुझ से कहती है आज तुम शा'इर
- Meem Maroof Ashraf
मुझ
से
कहती
है
आज
तुम
शा'इर
हो
अगर
तो
मिरी
बदौलत
हो
- Meem Maroof Ashraf
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इक
वही
सुब्ह-ओ-शाम
है
'क़ैसर'
और
क्या
तुझ
को
काम
है
'क़ैसर
अब
तो
बस
ख़ुद-कुशी
ही
रस्ता
है
और
वो
भी
हराम
है
'क़ैसर'
अब
यक़ीं
किस
पे
कीजिएगा
भला
हर
कोई
ख़ुश-कलाम
है
'क़ैसर'
हम
ने
चाहा
था
टूट
कर
उस
को
ख़ूब
ये
इत्तिहाम
है
'क़ैसर'
जिस
के
हर
शे'र
में
है
तू
पिंहाँ
उस
ही
शाइर
का
नाम
है
'क़ैसर'
बेशक
इंसान
है
ख़सारे
में
ये
ख़ुदा
का
कलाम
है
'क़ैसर'
देखो
जिस
ज़ाविये
से
दिल-कश
है
वो
तो
माह-ए-तमाम
है
'क़ैसर'
जब
से
देखा
है
वो
तन-ए-'उर्यां
हर
घड़ी
तिश्ना-काम
है
'क़ैसर'
जबकि
मुद्दत
से
मेरे
साथ
नहीं
क्यूँ
वो
फिर
हम-ख़िराम
है
'क़ैसर'
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Meem Maroof Ashraf
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दिल
का
आलम
अजीब
रहता
है
जब
ख़याल-ए-हबीब
रहता
है
पूरी
कोशिश
है
उस
को
पाने
की
बाक़ी
देखो
नसीब
रहता
है
जब
भी
सोचूँ
तिरे
बिछड़ने
का
एक
मंज़र
मुहीब
रहता
है
तेरा
ठुकराया
इक
गरीब
बशर
देखो
कब
तक
गरीब
रहता
है
शहर
की
इक
गली
नहीं
बाक़ी
हर
गली
में
रक़ीब
रहता
है
हैं
अजब
दूरियाँ
कि
वो
'क़ैसर'
हद
से
बढ़कर
क़रीब
रहता
है
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वो
जिस
के
वास्ते
दुनिया
लुटा
दी
वही
इक
शख़्स
था
दुनिया
हमारी
Meem Maroof Ashraf
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उजाला
खो
गया
है
और
अँधेरा
छा
गया
जानाँ
सज़ा
मैं
इश्क़
की
यानी
मुकम्मल
पा
गया
जानाँ
मज़े
जो
तेरी
क़ुर्बत
के
थे
सारे
भूल
बैठे
हैं
मज़ा
फ़ुर्क़त
में
तेरी
हम
को
इतना
आ
गया
जानाँ
ये
कैसा
याद
आना
है
ख़ुदारा
याद
मत
आना
कि
तेरा
याद
आना
ज़ेहन
मेरा
खा
गया
जानाँ
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Meem Maroof Ashraf
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कितनी
मुश्किल
से
तुझ
को
पाया
था
कितनी
आसानी
से
गँवा
डाला
Meem Maroof Ashraf
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