hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Meem Maroof Ashraf
ladi hai aankh mirii jab se teri aankhoñ se
ladi hai aankh mirii jab se teri aankhoñ se | लड़ी है आँख मिरी जब से तेरी आँखों से
- Meem Maroof Ashraf
लड़ी
है
आँख
मिरी
जब
से
तेरी
आँखों
से
सिवाए
तेरे
मुझे
कुछ
नज़र
नहीं
आता
- Meem Maroof Ashraf
Download Sher Image
मुझको
ये
नज़र
आया
के
वो
एक
बला
है
कुछ
ख़्वाब
है
कुछ
अस्ल
है
कुछ
तर्ज
-ए-
अदा
है
वो
ग़ैर
की
आग़ोश
में
रहने
लगा
शादाँ
उसको
नहीं
मालूम
के
दिल
मेरा
जला
है
Read Full
Navneet krishna
Send
Download Image
4 Likes
तू
जो
हर
रोज़
नए
हुस्न
पे
मर
जाता
है
तू
बताएगा
मुझे
इश्क़
है
क्या
जाने
दे
Ali Zaryoun
Send
Download Image
117 Likes
तुम
तो
सर्दी
की
हसीं
धूप
का
चेहरा
हो
जिसे
देखते
रहते
हैं
दीवार
से
जाते
हुए
हम
Nomaan Shauque
Send
Download Image
40 Likes
न
करो
बहस
हार
जाओगी
हुस्न
इतनी
बड़ी
दलील
नहीं
Jaun Elia
Send
Download Image
264 Likes
आसमाँ
इतनी
बुलंदी
पे
जो
इतराता
है
भूल
जाता
है
ज़मीं
से
ही
नज़र
आता
है
Waseem Barelvi
Send
Download Image
78 Likes
साक़ी
कुछ
आज
तुझ
को
ख़बर
है
बसंत
की
हर
सू
बहार
पेश-ए-नज़र
है
बसंत
की
Ufuq Lakhnavi
Send
Download Image
18 Likes
तेरा
लिक्खा
जो
पढ़ूँ
तो
तेरी
आवाज़
सुनूँ
तेरी
आवाज़
सुनूँ
तो
तेरा
चेहरा
देखूँ
Bhaskar Shukla
Send
Download Image
28 Likes
सब
लोग
जिधर
वो
हैं
उधर
देख
रहे
हैं
हम
देखने
वालों
की
नज़र
देख
रहे
हैं
Dagh Dehlvi
Send
Download Image
55 Likes
ये
वो
क़बीला
है
जो
हुस्न
को
ख़ुदा
माने
यहाँ
पे
कौन
तेरी
बात
का
बुरा
माने
इशारा
कर
दिया
है
आपकी
तरफ़
मैंने
ये
बच्चे
पूछ
रहे
थे
कि
बे-वफ़ा
माने
Read Full
Kushal Dauneria
Send
Download Image
74 Likes
देखने
के
लिए
सारा
आलम
भी
कम
चाहने
के
लिए
एक
चेहरा
बहुत
Asad Badayuni
Send
Download Image
45 Likes
Read More
अव्वल
अव्वल
जो
देखती
थीं
तुम
वो
ही
दरकार
है
नज़र
हम
को
Meem Maroof Ashraf
Send
Download Image
1 Like
मुझ
को
तुम
बे-वफ़ा
समझते
हो
ख़ैर
कुछ
तो
भला
समझते
हो
इश्क़
तौफीक़
है
मगर
इक
तुम
इश्क़
को
मसअला
समझते
हो
हू-ब-हू
'जौन'
की
सी
हालत
है
जौन
वो
'एलिया'
समझते
हो
खु़द
को
बर्बाद
करना
पड़ता
है
इश्क़
का
क़ाइदा
समझते
हो
कोई
आ
कर
के
ले
गया
उस
को
यानी
कि
तीसरा
समझते
हो
इश्क़
तुम
को
मज़ाक़
लगता
है
तुम
मोहब्बत
को
क्या
समझते
हो
Read Full
Meem Maroof Ashraf
Download Image
2 Likes
शोख़
ने
क्या
ही
ज़ुल्फ़
लहराई
अज़-फ़लक
बारिशें
निकल
आईं
Meem Maroof Ashraf
Send
Download Image
2 Likes
और
तो
क़ासिद
नहीं
कुछ
उन
से
कहने
के
लिए
उन
से
बस
तू
इतना
कहना
याद
आना
छोड़
दें
Meem Maroof Ashraf
Send
Download Image
0 Likes
दिल
का
आलम
अजीब
रहता
है
जब
ख़याल-ए-हबीब
रहता
है
पूरी
कोशिश
है
उस
को
पाने
की
बाक़ी
देखो
नसीब
रहता
है
जब
भी
सोचूँ
तिरे
बिछड़ने
का
एक
मंज़र
मुहीब
रहता
है
तेरा
ठुकराया
इक
गरीब
बशर
देखो
कब
तक
गरीब
रहता
है
शहर
की
इक
गली
नहीं
बाक़ी
हर
गली
में
रक़ीब
रहता
है
हैं
अजब
दूरियाँ
कि
वो
'क़ैसर'
हद
से
बढ़कर
क़रीब
रहता
है
Read Full
Meem Maroof Ashraf
Download Image
1 Like
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Kisaan Shayari
Dariya Shayari
Taj Mahal Shayari
Mohabbat Shayari
Dua Shayari