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Meem Maroof Ashraf
aaj tasveer us ki dekhi hai
aaj tasveer us ki dekhi hai | आज तस्वीर उस की देखी है
- Meem Maroof Ashraf
आज
तस्वीर
उस
की
देखी
है
आज
फिर
नींद
का
ज़ियाँ
होगा
- Meem Maroof Ashraf
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उसे
यूँँ
चेहरा-चेहरा
ढूँढता
हूँ
वो
जैसे
रात-दिन
सड़कों
पे
होगा
Shariq Kaifi
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ख़ैरात
में
अब
दे
दिया
जाए
इसे
हर
रात
नीदें
ज़ाया'
होती
रहती
हैं
Nishant Singh
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इश्क़
पहले
बना
था
जाने
जाँ
नींद
की
गोलियाँ
बनीं
थीं
फिर
Ashutosh Kumar "Baagi"
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इन्हीं
ग़म
की
घटाओं
से
ख़ुशी
का
चाँद
निकलेगा
अँधेरी
रात
के
पर्दे
में
दिन
की
रौशनी
भी
है
Akhtar Shirani
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ख़्वाब
पलकों
की
हथेली
पे
चुने
रहते
हैं
कौन
जाने
वो
कभी
नींद
चुराने
आए
मुझ
पे
उतरे
मेरे
अल्हाम
की
बारिश
बन
कर
मुझ
को
इक
बूॅंद
समुंदर
में
छुपाने
आए
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Khalil Ur Rehman Qamar
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ईद
के
रोज़
यही
अपनी
दु'आ
है
रब
से
मुल्क
में
अमन
का,
उलफ़त
का
बसेरा
हो
जाए
हर
परेशानी
से
हर
शख़्स
को
मिल
जाए
नजात
इस
सियह
रात
का
बस
जल्द
सवेरा
हो
जाए
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Zaki Azmi
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तुम्हारा
ख़्वाब
भी
आए
तो
नींद
पूरी
हो
मैं
सो
तो
जाऊँगा
नींद
आने
की
दवा
लेकर
Swapnil Tiwari
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फेंक
कर
रात
को
दीवार
पे
मारे
होते
मेरे
हाथों
में
अगर
चाँद
सितारे
होते
Unknown
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दिन
ढल
गया
और
रात
गुज़रने
की
आस
में
सूरज
नदी
में
डूब
गया,
हम
गिलास
में
Rahat Indori
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मौत
ने
सारी
रात
हमारी
नब्ज़
टटोली
ऐसा
मरने
का
माहौल
बनाया
हमने
घर
से
निकले
चौक
गए
फिर
पार्क
में
बैठे
तन्हाई
को
जगह-जगह
बिखराया
हमने
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Shariq Kaifi
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कुर्सी
पंखा
है
और
रस्सी
है
और
ख़ाली
है
मेरा
कमरा
भी
Meem Maroof Ashraf
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वो
मेरे
हाल
से
वाक़िफ़
है
फिर
भी
मुस्कुराता
है
मैं
कैसे
मान
लूँ
उस
को
मिरे
हालात
का
ग़म
है
Meem Maroof Ashraf
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इरादा
फिर
किसी
से
कर
लिया
उस
ने
मोहब्बत
का
सो
अब
ये
देखना
है
कौन
है
ज़द
में
तबाही
के
चलो
अब
अशरफ़-ए-ख़स्ता
यहाँ
से
कूच
करते
हैं
बहुत
एहसान
तुम
पर
हो
गए
हैं
जिंदगानी
के
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Meem Maroof Ashraf
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जो
हसीं
जिस्म
खा
रहा
है
तिरा
क्या
वो
दुल्हन
बनाएगा
तुझ
को
Meem Maroof Ashraf
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अन-गिनत
जिस्मों
की
सहूलत
थी
मुझ
को
पर
रूह
की
ज़रुरत
थी
जाने
कितने
ही
उस
पे
मरते
थे
जाने
कितनों
की
एक
चाहत
थी
वो
सिया
क़ल्ब
वाली
इक
लड़की
वाक़ई
कितनी
ख़ूब-सूरत
थी
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Meem Maroof Ashraf
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