asar baaton ka tujh par ab sitamgar kuchh nahin hota | असर बातों का तुझ पर अब सितमगर कुछ नहीं होता

  - Meem Maroof Ashraf
असरबातोंकातुझपरअबसितमगरकुछनहींहोता
क़सी-उल-क़ल्बइसदर्जाकिपत्थरकुछनहींहोता
यक़ींगरचेआएआज़माकरदेखलीजेगा
सिवादुखकेमोहब्बतमेंमुयस्सरकुछनहींहोता
नज़रजोकामकरतीहैकहाँख़ंजरवोकरतेहैं
नज़रकेसामनेतलवार-ओ-नश्तरकुछनहींहोता
ग़ज़लअश'आरतेरेहुस्नकेमरहून-ए-मिन्नतहैं
येज़नतेरीबदौलतहैसुख़न-वरकुछनहींहोता
ज़रूरतहैउमरफ़ारूक़जैसेपेशवाओंकी
नज़रमेंजिनकीकमतरऔरबर-तरकुछनहींहोता
लुटाकरसबहुसैनइब्न-ए-अलीनेहमकोबतलाया
किआगेदीनकेअब्बास-ओ-अकबरकुछनहींहोता
  - Meem Maroof Ashraf
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