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maqbul alam
falak ke chaand suraj aur anjum se nahin milte
falak ke chaand suraj aur anjum se nahin milte | फ़लक के चाँद, सूरज और अंजुम से नहीं मिलते
- maqbul alam
फ़लक
के
चाँद,
सूरज
और
अंजुम
से
नहीं
मिलते
चमकते
है
मगर
तेरे
तबस्सुम
से
नहीं
मिलते
तुम्हारे
चेहरे
से
ही
हु-ब-हू
ये
मेल
खाते
है
मेरी
ग़ज़लें
जो
मेरे
ही
तरन्नुम
से
नहीं
मिलते
- maqbul alam
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भले
हैं
फ़ासले
क़ुर्बत
से
ख़ौफ़
लगता
है
ये
क्या
बला
है
जो
ऐसी
विरानी
क़ैद
हुई
Prashant Beybaar
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रास्ता
भूल
के
आ
निकले
हैं
हम
तेरे
लोग
नहीं
थे
दुनिया
Ashraf Yousafi
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यही
सोच
कर
ख़ुद
पे
हम
नाज़
करते
कि
हम
उनकी
पहली
मुहब्बत
रहे
हैं
Harsh saxena
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मशवरा
हम
भी
तो
दे
सकते
थे
पर
तेरा
साथ
दे
रहे
थे
हम
Vishal Singh Tabish
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इस
बात
पर
तू
हाथ
मिला
अब
तेरी
तरह
ग़म
का
लिबास
ओढ़
के
बैठा
हुआ
हूँ
मैं
shaan manral
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मैं
वहाँ
हूँ
जहाँ
नहीं
कोई
कुछ
नहीं
था
जहाँ
वहाँ
मैं
था
Ejaz Azmi
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बस
ख़ुद-कुशी
से
बचने
का
जरिया
है
शा'इरी
हमको
सुख़न-वरी
से
तो
शोहरत
तलब
नहीं
Sabir Hussain
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हम
ख़ुश
हैं
हमें
धूप
विरासत
में
मिली
है
अजदाद
कहीं
पेड़
भी
कुछ
बो
गए
होते
Shahryar
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किया
तबाह
तो
दिल्ली
ने
भी
बहुत
'बिस्मिल'
मगर
ख़ुदा
की
क़सम
लखनऊ
ने
लूट
लिया
Bismil Saeedi
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शायद
आ
जाए
कभी
देखने
वो
रश्क-ए-मसीह
मैं
किसी
और
से
इस
वास्ते
अच्छा
न
हुआ
Anwar Taban
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मुसव्विरों
ने
हमें
क्या
दिया
मुहब्बत
से
ग़मों
को
मेरा
ही
चेहरा
दिया
मुहब्बत
से
किसी
के
प्यार
को
ठुकरा
दिया
था
मैंने
भी
किसी
ने
मुझको
भी
ठुकरा
दिया
मुहब्बत
से
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ज़माने
भर
के
सब
तैराक
डूबे
है
किनारों
पर
ये
दरिया
ए
मुहब्बत
है
लिया
है
जाँ
इशारों
पर
तुम्हारे
इश्क़
में
इस
दर्ज़ा
मैं
पागल
हुआ
हूँ
की
तुम्हारा
नाम
लिख
डाला
है
घर
के
हर
दीवारों
पर
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लोग
बैठे
है
जो
सभी
तन्हा
उनको
ना
छोड़ना
कभी
तन्हा
ये
जो
महफिल
लगी
है
रोने
पर
हँस
के
हो
जाऊंगा
अभी
तन्हा
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तुम
कर
बैठे
थे
न
जाने
कितने
वादे
लफ़्ज़ों
में
हमने
तुम
सेे
प्यार
किया
था
सीधे-साधे
लफ़्ज़ों
में
मैंने
चाहा
था
लिखूँ
मैं
क़ुदरत
की
रंगीनी
को
बस
तेरा
ही
नाम
यहाँ
पर
आते-जाते
लफ़्ज़ों
में
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तेरी
तस्वीर
ना
हो
सीने
में
क्या
मज़ा
ख़ाक
ऐसे
जीने
में
जाम
हाथों
में
सामने
तू
है
ऐसी
मुश्किल
हुई
है
पीने
में
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