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Manohar Shimpi
sadaa asliyat aaina hi dikhaati
sadaa asliyat aaina hi dikhaati | सदा अस्लियत आइना ही दिखाती
- Manohar Shimpi
सदा
अस्लियत
आइना
ही
दिखाती
हमें
फ़र्क
अच्छे
बुरे
का
सिखाती
- Manohar Shimpi
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ख़ुद
को
शीशा
कर
लिया
है
यार
मैंने
अब
तो
तेरा
देखना
बनता
है
मुझ
को
Neeraj Neer
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तेरा
लिक्खा
जो
पढ़ूँ
तो
तेरी
आवाज़
सुनूँ
तेरी
आवाज़
सुनूँ
तो
तेरा
चेहरा
देखूँ
Bhaskar Shukla
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रोना
हो
आसान
हमारा
इतना
कर
नुक़्सान
हमारा
बात
नहीं
करनी
तो
मत
कर
चेहरा
तो
पहचान
हमारा
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Shariq Kaifi
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इक
गुल
के
मुरझाने
पर
क्या
गुलशन
में
कोहराम
मचा
इक
चेहरा
कुम्हला
जाने
से
कितने
दिल
नाशाद
हुए
Faiz Ahmad Faiz
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हम
ऐसों
को
बना
कर
के
ख़ुदा
उकता
गया
था
फिर
तेरी
आँखें
बना
डाली
तेरा
चेहरा
बना
डाला
Ankit Maurya
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घूमता
रहता
है
हर
वक़्त
मेरी
आँखों
में
एक
चेहरा
जो
कई
साल
से
देखा
भी
नहीं
Riyaz Tariq
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तुर्रा-ए-काकुल-ए-पेचां
रुख़-ए-नूरानी
पर
चश्मा-ए-आईना
में
साँप
सा
लहराता
है
Miyan Dad Khan Sayyah
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इतना
प्यारा
है
वो
चेहरा
कि
नज़र
पड़ते
ही
लोग
हाथों
की
लकीरों
की
तरफ़
देखते
हैं
Nadir Ariz
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चेहरा
धुँदला
सा
था
और
सुनहरे
झुमके
थे
बादल
ने
कानों
में
चाँद
के
टुकड़े
पहने
थे
इक
दूजे
को
खोने
से
हम
इतना
डरते
थे
ग़ुस्सा
भी
होते
तो
बातें
करते
रहते
थे
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Vikram Gaur Vairagi
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मैं
तो
'मुनीर'
आईने
में
ख़ुद
को
तक
कर
हैरान
हुआ
ये
चेहरा
कुछ
और
तरह
था
पहले
किसी
ज़माने
में
Muneer Niyazi
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काश
उस
वक़्त
सब
खड़े
होते
अपने
हक़
के
लिए
अड़े
होते
ज्ञान
लेने
पे
रोक
लगने
से
हाल-बेहाल
दिन
बड़े
होते
दश्त
पहले
बड़े
बड़े
ही
थे
फूल
पत्ते
वहाँ
पड़े
होते
दफ़्न
मम्मी
अगर
कहीं
हो
तो
ख़ास
मुर्दे
वहाँ
गड़े
होते
अपने
ही
आशियाँ
के
ही
ख़ातिर
तेज़
बारिश
से
वो
लड़े
होते
रोज़
पढ़ने
से
रोष
ही
हो
तो
फ़ासले
जीत
के
कड़े
होते
दफ़्न
सच
बात
जब
'मनोहर'
हो
कान
भी
सुनने
को
खड़े
होते
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Manohar Shimpi
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नदी
में
दोस्त
सब
मिलके
नहाना
छोड़
आए
हैं
नहाते
तैरते
पानी
उड़ाना
छोड़
आए
हैं
Manohar Shimpi
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तुलू-ए-सुब्ह
हर
दिन
कुछ
बताए
है
नई
उम्मीद
जीने
की
जगाए
है
Manohar Shimpi
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हक़
के
लिए
चलता
सफ़र
में
कोई
है
ख़ुद
मोम
सा
जलता
नज़र
में
कोई
है
Manohar Shimpi
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फूल
शादाब
आज
कल
खिलते
चैत
बैसाख
में
कँवल
खिलते
ख़ामुशी
से
उसे
चलो
मिलते
इश्क़
के
रंग
आज
कल
खिलते
रात
दिन
फूल
कौन
से
खिलते
कब
महकते
हुए
कमल
खिलते
काश
खोए
हुए
वो
पल
मिलते
ख़ास
लोगों
सिवा
न
पल
खिलते
फूल
कैसे
सराब
में
खिलते
रेत
में
गुल
नहीं
रमल
खिलते
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Manohar Shimpi
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