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Manohar Shimpi
paazeb ki aawaaz hi ab goonjti hai kaan men
paazeb ki aawaaz hi ab goonjti hai kaan men | पाज़ेब की आवाज़ ही अब गूॅंजती है कान में
- Manohar Shimpi
पाज़ेब
की
आवाज़
ही
अब
गूॅंजती
है
कान
में
होगी
जहाँ
भी
तू
कहीं
लेकिन
रहेगी
ध्यान
में
- Manohar Shimpi
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तुम्हारी
याद
का
रंग
डाल
कर
के
कहा
तन्हाई
ने
होली
मुबारक
!
Bhaskar Shukla
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जन्मदिन
पर
भी
मुझे
वो
याद
अब
करता
नहीं
इस
ज़माने
में
कोई
इतना
भी
मुफ़्लिस
होगा
क्या
Harsh saxena
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वो
किसी
को
याद
कर
के
मुस्कुराया
था
उधर
और
मैं
नादान
ये
समझा
कि
वो
मेरा
हुआ
Iqbal Ashhar
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इस
ज़िन्दगी
में
इतनी
फ़राग़त
किसे
नसीब
इतना
न
याद
आ
कि
तुझे
भूल
जाएँ
हम
Ahmad Faraz
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जाते
जाते
आप
इतना
काम
तो
कीजे
मिरा
याद
का
सारा
सर-ओ-सामाँ
जलाते
जाइए
Jaun Elia
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तेरी
अंँगड़ाई
के
आलम
का
ख़याल
आया
जब
ज़ेहन-ए-वीरांँ
में
खनकने
लगे
कंगन
कितने
Shashank Shekhar Pathak
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एक
चेहरा
है
जो
आँखों
में
बसा
रहता
है
इक
तसव्वुर
है
जो
तन्हा
नहीं
होने
देता
Javed Naseemi
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फूल
ही
फूल
याद
आते
हैं
आप
जब
जब
भी
मुस्कुराते
हैं
Sajid Premi
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कुछ
इस
तरह
से
याद
आते
रहे
हो
कि
अब
भूल
जाने
को
जी
चाहता
है
Akhtar Shirani
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आख़िरी
बार
मैं
कब
उस
से
मिला
याद
नहीं
बस
यही
याद
है
इक
शाम
बहुत
भारी
थी
Hammad Niyazi
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मुब्तसिम
सी
हँसी
थमी
सी
है
तेरी
मुस्कान
में
कमी
सी
है
आज
क्यूँँ
ही
बुझी
बुझी
सी
हो
आँख
में
फिर
दिखे
नमी
सी
है
वो
बिछड़के
कभी
कभी
मिलना
बात
ही
ख़ास
बाहमी
सी
है
सिर्फ़
मंज़िल
तेरी
मेरी
इक
हो
आरज़ू
आम
आदमी
सी
है
इंतिहा
की
कहाँ
घड़ी
ही
है
फिर
हमें
क्यूँ
दिखी
ख़मी
सी
है
इस
तरह
ये
बहार
ही
आई
ये
फ़ज़ा
भी
न
मौसमी
सी
है
वक़्त
की
ये
सुई
रुके
है
कब
रुत
यही
महज़
लाज़मी
सी
है
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Manohar Shimpi
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फूल
शादाब
आजकल
खिलते
चैत
बैसाख
में
कँवल
खिलते
Manohar Shimpi
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कर्ब
से
ही
कोई
रिश्ता
है
पुराना
ख़्वाब
दे
जाते
नया
फिर
इक
बहाना
Manohar Shimpi
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हर्फ़-दर-हर्फ़
मुस्कुराओ
ना
बात
हँस
के
कभी
बताओ
ना
मसअला
कोई
भी
रहे
यारो
दोस्तों
को
उसे
बताओ
ना
ख़्वाहिशें
और
भी
रही
होंगी
अब
मेरे
तुम
क़रीब
आओ
ना
इश्क़
का
ज़िक्र
जब
कभी
हो
तो
प्यार
से
तुम
भी
मुस्कुराओ
ना
हश्र
जो
भी
रहे
सियासत
का
वोट
दो
जश्न
फिर
मनाओ
ना
याज़
लिखके
किसे
बताओगे
वो
'मनोहर'
अभी
बताओ
ना
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Manohar Shimpi
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ये
गोया
आदमी
भी
आदमी
होता
लिहाज़-ए-इश्क़
भी
तो
लाज़मी
होता
Manohar Shimpi
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