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Manohar Shimpi
maanjhi ko doori to tay karna hai
maanjhi ko doori to tay karna hai | माँझी को दूरी तो तय करना है
- Manohar Shimpi
माँझी
को
दूरी
तो
तय
करना
है
कश्ती
थोड़े
लहराने
आए
हैं
- Manohar Shimpi
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जो
उस
तरफ़
से
इशारा
कभी
किया
उस
ने
मैं
डूब
जाऊंगा
दरिया
को
पार
करते
हुए
Ghulam Murtaza Rahi
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मल्लाहों
को
इल्ज़ाम
न
दो
तुम
साहिल
वाले
क्या
जानो
ये
तूफ़ाँ
कौन
उठाता
है
ये
कश्ती
कौन
डुबोता
है
Hafeez Jalandhari
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कभी
कभी
तो
ये
वहशत
भी
हम
पे
गुज़री
है
कि
दिल
के
साथ
ही
देखा
है
डूबना
शब
का
Abhishek shukla
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एक
कश्ती
क्यूँ
अभी
लौटी
नहीं
क्यूँ
किनारे
शाम
से
ख़ामोश
हैं
Umesh Maurya
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मुक़ाबिल
फ़ासलों
से
ही
मोहब्बत
डूब
जाएगी
सुनोगी
झूठी
बातें
तुम
हक़ीक़त
डूब
जाएगी
चलेगी
तब
तलक
जब
तक
तिरी
परछाईं
देखेगी
तिरा
जब
हुस्न
देखेगी
सियासत
डूब
जाएगी
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Anurag Pandey
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दिन
ढल
गया
और
रात
गुज़रने
की
आस
में
सूरज
नदी
में
डूब
गया,
हम
गिलास
में
Rahat Indori
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वो
थे
जवाब
के
साहिल
पे
मुंतज़िर
लेकिन
समय
की
नाव
में
मेरा
सवाल
डूब
गया
Bekal Utsahi
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मुझको
ऐसे
देख
रहा
हैरानी
में
जैसे
सूरज
देख
लिया
पेशानी
में
मैं
भी
उसको
देख
रहा
हूँ
कुछ
ऐसे
जैसे
सूरज
डूब
रहा
हो
पानी
में
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DEVANSH TIWARI
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बस
टूटी
कश्ती
ही
बतला
सकती
है
इक
दरिया
की
कितनी
शक्लें
होती
हैं
Soubhari Deepesh Sharma
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हमने
तुझ
पे
छोड़
दिया
है
कश्ती,
दरिया,
भँवर,
किनारा
Siddharth Saaz
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क़ल्ब
भी
ग़म
से
भर
गया
कब
का
टूट
के
फिर
बिखर
गया
कब
का
हादिसे
के
लिए
करें
क्या
ही
रोष
था
जो
उतर
गया
कब
का
यूँँ
बिछड़कर
कहाँ
मिले
साहिल
ख़ास
लम्हा
गुज़र
गया
कब
का
अब
चलो
बात
और
करते
हैं
देखो
तूफाँ
ठहर
गया
कब
का
दोस्त
कहते
उसे
हुआ
क्या
है
था
वो
बिगड़ा
सुधर
गया
कब
का
ज़िक्र
जिसका
सभी
करे
हैं
वो
क़ैदस
कैसे
घर
गया
कब
का
गुम-शुदा
शख़्स
जो
'मनोहर'
था
शोर-ग़ुल
में
वो
मर
गया
कब
का
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Manohar Shimpi
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इंतिहा
हो
गई
दू-बदू
है
नहीं
अम्न
की
अब
कहाँ
आरज़ू
ही
करें
Manohar Shimpi
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तुलू-ए-सुब्ह
हर
दिन
कुछ
बताए
है
नई
उम्मीद
जीने
की
जगाए
है
Manohar Shimpi
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साहिब-ए-मसनद
रहे
हो
बात
अंदर
की
बताओ
कारनामा
ख़ूब
अच्छा
है
किया
तो
मुस्कुराओ
Manohar Shimpi
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चौदहवीं
को
चाँद
थोड़ा
और
ही
इतराता
भूल
जाता
वो
अमावस
को
कहीं
खो
जाता
Manohar Shimpi
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