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Manohar Shimpi
akshar hi bachchon ko qadam aage badhaana chahiye
akshar hi bachchon ko qadam aage badhaana chahiye | अक्सर ही बच्चों को क़दम आगे बढ़ाना चाहिए
- Manohar Shimpi
अक्सर
ही
बच्चों
को
क़दम
आगे
बढ़ाना
चाहिए
ज़िंदा-दिली
से
ही
हमें
बचपन
बचाना
चाहिए
- Manohar Shimpi
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अब
तो
चुप-चाप
शाम
आती
है
पहले
चिड़ियों
के
शोर
होते
थे
Mohammad Alvi
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सब
का
ख़ुशी
से
फ़ासला
एक
क़दम
है
हर
घर
में
बस
एक
ही
कमरा
कम
है
Javed Akhtar
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उसी
वक़्त
अपने
क़दम
मोड़
लेना
नदी
पार
से
जब
इशारा
करूँँगा
Siddharth Saaz
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मैं
हर
क़दम
पर
सँभल
सँभल
कर
भटकने
वाला
भटकने
वालों
से
काफ़ी
बेहतर
भटक
रहा
हूँ
Pallav Mishra
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वो
शांत
बैठा
है
कब
से
मैं
शोर
क्यूँँॅं
न
करूँॅं
बस
एक
बार
वो
कह
दे
कि
चुप
तो
चूँ
न
करूँॅं
Charagh Sharma
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दिल
पर
दस्तक
देने
कौन
आ
निकला
है
किस
की
आहट
सुनता
हूँ
वीराने
में
Gulzar
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तुझे
ख़याल
नहीं
है
सो
हम
बढ़ा
रहे
हैं
फिर
इक
दफ़ा
तेरी
ज़ानिब
क़दम
बढ़ा
रहे
हैं
बहुत
से
आए
तुझे
जीतने
की
ख़्वाहिश
में
हम
एक
कोने
में
बैठे
रक़म
बढ़ा
रहे
हैं
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Zahid Bashir
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अभी
तो
शाम
की
दस्तक
हुई
है
अभी
से
लग
गया
बिस्तर
हमारा
यही
तन्हाई
है
जन्नत
हमारी
इसी
जन्नत
में
है
अब
घर
हमारा
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Vikas Sharma Raaz
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दरवाज़े
पर
दस्तक
देने
से
पहले
मेरे
हाथ
दु'आ
में
ख़ुद
उठ
जाते
हैं
Tanoj Dadhich
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इश्क़
अगर
बढ़ता
है
तो
फिर
झगड़े
भी
तो
बढ़ते
हैं
आमदनी
जब
बढ़ती
है
तो
ख़र्चे
भी
तो
बढ़ते
हैं
माना
मंज़िल
नहीं
मिली
है
हमको
लेकिन
रोज़ाना
एक
क़दम
उसकी
जानिब
हम
आगे
भी
तो
बढ़ते
हैं
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Tanoj Dadhich
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रियासत
भी
ग़रीबों
को
दुहाई
क्यूँँ
नहीं
देती
अमीरों
आह
उनकी
फिर
सुनाई
क्यूँँ
नहीं
देती
Manohar Shimpi
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अंजुमन
में
कमी
रही
है
अब
दिल
में
चाहत
तेरी
वही
है
अब
Manohar Shimpi
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बुरी
बात
का
क्यूँँ
न
इनकार
करना
हमेशा
सदाक़त
का
इक़रार
करना
खुले
आसमाँ
में
करे
जो
मुहब्बत
सभी
काश
कहते
उसे
प्यार
करना
ज़माने
मिसालें
किसे
अब
पता
हैं
ज़माने
की
रंगत
का
इक़रार
करना
हिफ़ाज़त
भरी
वो
नज़र
और
ही
है
पता
है
निगाहों
से
रुख़्सार
करना
बग़ावत
अदावत
करे
जो
हमेशा
उसे
ख़ूब
आता
है
तलवार
करना
बहारें
नज़ारे
बहारें
नज़ारे
कभी
हम-नशीं
का
ही
दीदार
करना
बयाँ
जो
किया
है
किसी
ने
ग़लत
तो
उसी
बात
का
फिर
तिरस्कार
करना
निगाहें
ज़ुबाँ
की
समझ
है
'मनोहर'
किसी
अजनबी
से
न
तकरार
करना
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Manohar Shimpi
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रात
को
ही
चराग़
जलते
हैं
चाँद
तारें
तभी
निकलते
हैं
दश्त
में
जब
दरख़्त
जलते
तब
लोग
फिर
आँख
ख़ूब
मलते
हैं
हौसलों
से
भरे
परिंदे
हैं
साथ
उड़ते
हुए
निकलते
हैं
दोस्त
भी
इत्तिफ़ाक़
से
मिलते
दूर
तक
साथ
साथ
चलते
हैं
रात
भर
जो
कई
दफ़ा
जगते
बारहा
आँख
फिर
मसलते
हैं
बंदगी
शाम
रंग
से
हो
तो
हम
उसी
रंग
में
ही
ढलते
हैं
अस्ल
में
फ़ेहरिस्त
का
क्या
है
नाम
जब
रोज़
सब
बदलते
हैं
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Manohar Shimpi
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शहर
का
मसअला
रास्ते
के
लिए
लोग
हैं
सब
ख़फ़ा
लाल
चेहरे
लिए
ख़ास
अश'आर
ही
थे
तुम्हारे
लिए
ज़िक्र
उसका
करूँॅं
क्यूँँ
किसी
के
लिए
आजकल
हादिसे
ख़ूब
होते
रहें
लोग
होते
बहुत
देखने
के
लिए
सात
जन्मों
के
ही
साथ
को
छोड़
के
बे-वफ़ा
कुछ
हुए
सात
फेरे
लिए
दिल
बड़ा
है
तो
फिर
बात
करते
चलो
दर्द
ही
बाटते
वास्ते
के
लिए
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Manohar Shimpi
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