raat ko hi charaagh jalte hain | रात को ही चराग़ जलते हैं

  - Manohar Shimpi
रातकोहीचराग़जलतेहैं
चाँदतारेंतभीनिकलतेहैं
दश्तमेंजबदरख़्तजलतेतब
लोगफिरआँखख़ूबमलतेहैं
हौसलोंसेभरेपरिंदेहैं
साथउड़तेहुएनिकलतेहैं
दोस्तभीइत्तिफ़ाक़सेमिलते
दूरतकसाथसाथचलतेहैं
रातभरजोकईदफ़ाजगते
बारहाआँखफिरमसलतेहैं
बंदगीशामरंगसेहोतो
हमउसीरंगमेंहीढलतेहैं
अस्लमेंफ़ेहरिस्तकाक्याहै
नामजबरोज़सबबदलतेहैं
  - Manohar Shimpi
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