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Manohar Shimpi
aasmaañ men abr hai to chaand taare bhi dikhhenge
aasmaañ men abr hai to chaand taare bhi dikhhenge | आसमाँ में अब्र है तो चाँद तारे भी दिखेंगे
- Manohar Shimpi
आसमाँ
में
अब्र
है
तो
चाँद
तारे
भी
दिखेंगे
रोज़
आते
माँ
के
आँचल
में
मुझे
मिलने
फ़लक
से
- Manohar Shimpi
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अगर
हुकूमत
तुम्हारी
तस्वीर
छाप
दे
नोट
पर
मेरी
दोस्त
तो
देखना
तुम
कि
लोग
बिल्कुल
फिजूलखर्ची
नहीं
करेंगे
हमारे
चंद
अच्छे
दोस्तों
ने
ये
वा'दा
ख़ुद
से
किया
हुआ
है
कि
शक्ल
अल्लाह
ने
अच्छी
दी
है
सो
बातें
अच्छी
नहीं
करेंगे
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Rehman Faris
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उसने
खिड़की
से
चाँद
देखा
था
मैंने
खिड़की
में
चाँद
देखा
है
Zubair Ali Tabish
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चाँद
का
फिर
मेरा
रस्ता
देखती
आँखें
तुम्हारी
आज
करवाचौथ
के
दिन
काश
हम
तुम
साथ
होते
Gaurav Singh
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रोज़
तारों
को
नुमाइश
में
ख़लल
पड़ता
है
चाँद
पागल
है
अँधेरे
में
निकल
पड़ता
है
Rahat Indori
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चाँद
को
दूरबीन
से
देखूँ
शाइरों
का
ये
काम
थोड़ी
है
Saarthi Baidyanath
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यही
है
ज़िंदगी
कुछ
ख़्वाब
चंद
उम्मीदें
इन्हीं
खिलौनों
से
तुम
भी
बहल
सको
तो
चलो
Nida Fazli
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माँग
सिन्दूर
भरी
हाथ
हिनाई
करके
रूप
जोबन
का
ज़रा
और
निखर
आएगा
जिसके
होने
से
मेरी
रात
है
रौशन
रौशन
चाँद
में
आज
वही
अक्स
नज़र
आएगा
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Azhar Iqbal
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ईद
के
बा'द
वो
मिलने
के
लिए
आए
हैं
ईद
का
चाँद
नज़र
आने
लगा
ईद
के
बा'द
Unknown
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जो
कल
शब
से
तन्हा
था
कैसा
होगा
वो
निस्फ़
चाँद
अब
जाने
किस
का
होगा
ALI ZUHRI
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ख़ुशबुओं
से
नहा
के
चाँद
आया
किस
क़दर
जगमगा
के
चाँद
आया
बद-नसीबी
है
मेरी
आँखों
की
मास्क
मुँह
पे
लगा
के
चाँद
आया
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Salman Zafar
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जालसाज़ी
से
सियासत
की
दुकाँ
क्या
ख़ाक
चलती
चापलूसी
से
हुकूमत
की
दुकाँ
क्या
ख़ाक
चलती
Manohar Shimpi
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तेरा
कमाल
बहुत
ख़ास
हर-हुनर
से
भी
रखे
तुझे
वो
ही
महफ़ूज़
हफ़-नज़र
से
भी
Manohar Shimpi
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अकेले
चले
हैं
न
रह
पाइएगा
कहीं
बीच
में
फिर
ठहर
जाइएगा
सफ़र
दूर
का
है
कहाँ
हम
सेफ़र
है
इन्हीं
फ़ासलों
से
न
घबराइएगा
अगर
कुछ
कहे
दिल
यही
है
फ़साना
किसी
अजनबी
को
न
समझाइएगा
जिधर
भी
रहो
इस
जहाँ
में
अकेले
लिए
फैसले
पर
न
पछताइएगा
कमी
कोई
हो
तो
'मनोहर'
बताना
न
ही
फिर
इशारे
से
समझाइएगा
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Manohar Shimpi
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आइना
अक्स
ही
बताता
है
बात
दिल
की
कहाँ
छिपाता
है
जब
कोई
शे'र
इश्क़
का
पढ़ता
सिर्फ़
तेरा
ख़याल
आता
है
एक
चेहरे
पे
हों
अगर
चेहरे
मुँह
से
फिर
कौन
सच
बताता
है
दर्द
मज़दूर
का
किसे
दिखता
कर्ब
उस
का
वही
जताता
है
कोई
नादान
तब्सिरा
क्यूँँ
दे
इल्म
बेकार
का
दिखाता
है
लोग
भी
हाथ
कम
दिखाते
अब
कौन
काहिन
सही
बताता
है
राज़
क्या
है
बड़ा
मनोहर
वो
एहतियातन
कहा
न
जाता
है
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Manohar Shimpi
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जैसे
माँ-बाप
का
हक़
अदा
ही
हुआ
तब-से
माँ
की
दु'आ
से
भला
ही
हुआ
रंग
चेहरे
पे
था
वो
अलग
ही
तो
था
अस्ल
में
शक्ल
से
सच
पता
ही
हुआ
फ़ालतू
बात
अब
कौन
सुनता
कोई
शे'र
सुनके
लगा
क्या
समा
ही
हुआ
ये
शब-ए-हिज्र
भी
कुछ
बयाँ
है
करे
जैसे
तारों
बिना
चंद्रमा
ही
हुआ
चंद
दिन
इस
जहाँ
में
बचे
जब
लगे
वक़्त
समझो
तभी
लापता
ही
हुआ
देखते
ही
उसे
ख़ास
है
जब
लगे
दिल-क़शी
का
असर
फिर
दवा
ही
हुआ
तुर्फ़गी
से
मिला
सब
उसी
का
ही
है
शुक्र
है
वो
मेरा
हम-नवा
ही
हुआ
कैसे
हालात
थे
तब
मनोहर
सुनो
रहनुमा
इक
मिला
वो
ख़ुदा
ही
हुआ
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Manohar Shimpi
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