zindagi kii bisaat hooñ aakhir | ज़िंदगी की बिसात हूँ आख़िर

  - Manohar Shimpi
ज़िंदगीकीबिसातहूँआख़िर
हैपताक़ाइनातहूँआख़िर
ज़ुल्मत-ए-शबकिसेबताऊँमैं
हाँक़यामतकीरातहूँआख़िर
ज़हरक्यूँँफैलतादिल-ओ-दिलमें
रोषकीएकबातहूँआख़िर
भूखहैप्यासजीतनेकीहै
खेलकीइकबिसातहूँआख़िर
हादिसाहीकहाँलगेअच्छा
क्याकहूँवारदातहूँआख़िर
कोईभीदफ़्नक्यूँँकरेमुझको
राज़कीख़ासबातहूँआख़िर
ज़िक्रजबरातका'मनोहर'हो
चाँदनीचाँद-रातहूँआख़िर
  - Manohar Shimpi
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