nigah-e-karam se qayaamat lage hai | निगाह-ए-करम से क़यामत लगे है

  - Manohar Shimpi
निगाह-ए-करमसेक़यामतलगेहै
नज़रसेबलाकीतलावतलगेहै
पताजबसफ़रमेंनहींहमसेफ़रका
मिलेदफ़अतनतोहक़ीक़तलगेहै
फ़ज़ामेंमहकजबतेरेहुस्नसेहै
बलाकीलगेवोनज़ाकतलगेहै
किसीकेलिएहोसकेहैवोकरना
सहीमेंख़ुदाकीइनायतलगेहै
कभीकश्मकशमेंबड़ाफ़र्कहोता
उसेदेखतेतबरियाज़तलगेहै
कोईवास्ताक्यूँँरहेदुश्मनीका
अगरवोहोतारफ़ाक़तलगेहै
इरादे'मनोहर'अगरनेकहैतो
ख़ुदाकीकोईयेबसारतलगेहै
  - Manohar Shimpi
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