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Manish watan
marne waale ko jab koi yaad nahin rakhta
marne waale ko jab koi yaad nahin rakhta | मरने वाले को जब कोई याद नहीं रखता
- Manish watan
मरने
वाले
को
जब
कोई
याद
नहीं
रखता
तो
जीने
वाला
भी
फिर
फ़रियाद
नहीं
रखता
मुझको
अब
तक
है
ग़म
देखे
जाने
पर
उसके
मैं
ज़िंदा
अब
ख़ुद
को
उसके
बाद
नहीं
रखता
- Manish watan
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अब
क्या
ही
ग़म
मनाएँ
कि
क्या
क्या
हुआ
मियाँ
बर्बाद
होना
ही
था
सो
बर्बाद
हो
गए
shaan manral
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यही
बहुत
है
मिरे
ग़म
में
तुम
शरीक
हुए
मैं
हॅंस
पड़ूँगा
अगर
तुमने
अब
दिलासा
दिया
Imran Aami
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वक़्त
की
गर्दिशों
का
ग़म
न
करो
हौसले
मुश्किलों
में
पलते
हैं
Mahfuzur Rahman Adil
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तुम्हारे
साथ
था
तो
मैं
गम-ए-उल्फ़त
में
उलझा
था
तुम्हें
छोड़ा
तो
ये
जाना
कि
दुनिया
ख़ूब-सूरत
है
Nirbhay Nishchhal
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मैं
वो
नाकाम
मुसव्विर
हूँ
जो
ख़ुद
के
हाथों
एक
उदासी
के
सिवा
कुछ
न
बना
पाया
है
Ashutosh Vdyarthi
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आज
तो
बे-सबब
उदास
है
जी
इश्क़
होता
तो
कोई
बात
भी
थी
Nasir Kazmi
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आधी
से
ज़ियादा
शब-ए-ग़म
काट
चुका
हूँ
अब
भी
अगर
आ
जाओ
तो
ये
रात
बड़ी
है
Saqib lakhanavi
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नहीं
है
लब
पे
दिखावे
का
भी
तबस्सुम
अब
हमें
किसी
ने
मुक़म्मल
उदास
कर
दिया
है
Amaan Haider
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ख़िलाफ़-ए-शर्त-ए-अना
था
वो
ख़्वाब
में
भी
मिले
मैं
नींद
नींद
को
तरसा
मगर
नहीं
सोया
ख़िलाफ़-ए-मौसम-ए-दिल
था
कि
थम
गई
बारिश
ख़िलाफ़-ए-ग़ुर्बत-ए-ग़म
है
कि
मैं
नहीं
रोया
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Khalil Ur Rehman Qamar
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ख़ुशी
में
भी
ख़ुशी
होती
नहीं
अब
तेरा
ग़म
ही
सतह
पर
तैरता
है
Umesh Maurya
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बताकर
गया
है
खुले
ज़ख़्म
रखना
कभी
ज़ख़्म
अपने
सिलेंगे
नहीं
हम
मुनासिब
नहीं
अब
हमारा
लगे
दिल
किसी
शख़्स
पर
अब
मरेंगे
नहीं
हम
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Manish watan
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ज़िंदगी
ज़िंदगी
में
नहीं
अब
बात
वो
आशिक़ी
में
नहीं
अब
जान
तक
दे
गए
लोग
सोचो
प्यार
ऐसा
किसी
में
नहीं
अब
इक
नज़र
आसमाँ
पर
है
डाली
चाँद
ख़ुद
रौशनी
में
नहीं
अब
बाद
तेरे
सफ़र
छोड़
आए
देख
हम
उस
गली
में
नहीं
अब
जो
मिरा
नाच
कर
होश
खो
दे
दम
किसी
मोरनी
में
नहीं
अब
इश्क़
पर
इक
कहावत
लिखी
है
इश्क़
शामिल
ख़ुशी
में
नहीं
अब
दुख
सभी
लोगों
का
मसअला
है
ये
कमी
बस
मनी
में
नहीं
अब
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Manish watan
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साथ
मेरे
कभी
चला
होता
तो
तुझे
दर्द
का
पता
होता
ख़्वाब
टूटे
हुए
मिले
मुझको
काश
पहले
कभी
जगा
होता
मैं
न
होता
दुखी
बिछड़ने
पर
यार
दिल
से
गले
लगा
होता
देख
तेरे
क़दम
नहीं
बढ़ते
छोड़
जाना
अगर
सज़ा
होता
एक
ठोकर
लगी
मुझे
फिर
से
काश
पहला
निशाँ
मिटा
होता
फिर
कहीं
एक
रोज़
जीता
मैं
यार
थोड़ा
अगर
बचा
होता
मौत
का
है
मनीष
ग़म
किसको
लाश
का
तो
अता-पता
होता
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Manish watan
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तिरी
इक
मुलाक़ात
से
भर
गया
दिल
तुझे
ज़िंदगी
भर
मिलेंगे
नहीं
हम
Manish watan
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पहले
चढ़ी
हल्दी
हमीं
पर
दोस्तों
फिर
चोट
ऐसी
दी
मिटी
अब
तक
नहीं
Manish watan
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