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Manish Pithaya
eent ka uttar agar patthar hai to haiwaaniyat hai
eent ka uttar agar patthar hai to haiwaaniyat hai | ईंट का उत्तर अगर पत्थर है तो हैवानियत है
- Manish Pithaya
ईंट
का
उत्तर
अगर
पत्थर
है
तो
हैवानियत
है
जो
ख़ुदा
को
देख
पाया
सब
में
तो
रूहानियत
है
धर्म
इक
ख़ुशबू
है
जिस
सेे
है
महकता
ये
जहाँ
है
जान
ले
इंसाँ
अगर
ईमान
तो
इंसानियत
है
- Manish Pithaya
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न
तीर्थ
जा
कर
न
धर्म
ग्रंथो
का
सार
पा
कर
सुकूँ
मिला
है
मुझे
तो
बस
तेरा
प्यार
पा
कर
ग़रीब
बच्चे
किताब
पढ़
कर
सँवर
रहे
हैं
अमीर
लड़के
बिगड़
रहे
हैं
दुलार
पा
कर
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Alankrat Srivastava
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इक
दिन
के
लिए
घर
को
परी-ख़ाना
बना
दे
अल्लाह
मुझे
उनका
ग़ुसल-ख़ाना
बना
दे
मोटी
है
बहुत
बीवी
तो
हुश्यार
रहा
कर
वो
मूड
में
आकर
तेरा
सुरमा
ना
बना
दे
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Paplu Lucknawi
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अगर
हुकूमत
तुम्हारी
तस्वीर
छाप
दे
नोट
पर
मेरी
दोस्त
तो
देखना
तुम
कि
लोग
बिल्कुल
फिजूलखर्ची
नहीं
करेंगे
हमारे
चंद
अच्छे
दोस्तों
ने
ये
वा'दा
ख़ुद
से
किया
हुआ
है
कि
शक्ल
अल्लाह
ने
अच्छी
दी
है
सो
बातें
अच्छी
नहीं
करेंगे
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Rehman Faris
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अब
तो
मज़हब
कोई
ऐसा
भी
चलाया
जाए
जिस
में
इंसान
को
इंसान
बनाया
जाए
Gopaldas Neeraj
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मुझ
से
कहा
जिब्रील-ए-जुनूँ
ने
ये
भी
वही-ए-इलाही
है
मज़हब
तो
बस
मज़हब-ए-दिल
है
बाक़ी
सब
गुमराही
है
Majrooh Sultanpuri
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कितने
हसीं
हो
माशा-अल्लाह
तुम
पे
मोहब्बत
ख़ूब
जचेगी
Zubair Ali Tabish
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घर
से
मस्जिद
है
बहुत
दूर
चलो
यूँँ
कर
लें
किसी
रोते
हुए
बच्चे
को
हँसाया
जाए
Nida Fazli
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तेरा
रुख़-ए-मुख़त्तत
क़ुरआन
है
हमारा
बोसा
भी
लें
तो
क्या
है
ईमान
है
हमारा
Meer Taqi Meer
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तुम्हें
ये
किसने
कहा
रब
को
नहीं
मानता
मैं
ये
और
बात
कि
मज़हब
को
नहीं
मानता
मैं
Bhaskar Shukla
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'मीर'
के
दीन-ओ-मज़हब
को
अब
पूछते
क्या
हो
उन
ने
तो
क़श्क़ा
खींचा
दैर
में
बैठा
कब
का
तर्क
इस्लाम
किया
Meer Taqi Meer
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अकड़
को
छोड
दे
बंदे
न
तेरे
काम
आएगी
तू
ज़िंदा
है
अभी
फिर
क्यूँँ
भला
किरदार
को
भूले
Manish Pithaya
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ज़िंदगी
तू
बदल
गई
लेकिन
हम
से
क्या
हो
सका
मोहब्बत
में
Manish Pithaya
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बात
गूँगो
की
समझनी
हो
अगर
उन
के
हाथों
का
इशारा
देखिए
Manish Pithaya
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एक
तो
बेदाग़
है
सीरत
भी
उसकी
और
लब
पर
तिल
बड़ा
बदमाश
उसका
Manish Pithaya
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अना
हिर्स-ओ-हवस
नफ़रत
कभी
सजने
नहीं
देंगे
सजाया
है
अगर
जीवन
मोहब्बत
ने
सजाया
है
Manish Pithaya
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