ham hain mata-e-koocha-o-bazaar ki tarah | हम हैं मता-ए-कूचा-ओ-बाज़ार की तरह

  - Majrooh Sultanpuri
हमहैंमता-ए-कूचा-ओ-बाज़ारकीतरह
उठतीहैहरनिगाहख़रीदारकीतरह
इसकू-ए-तिश्नगीमेंबहुतहैकिएकजाम
हाथगयाहैदौलत-ए-बेदारकीतरह
वोतोकहींहैऔरमगरदिलकेआस-पास
फिरतीहैकोईशयनिगह-ए-यारकीतरह
सीधीहैराह-ए-शौक़पेयूँँहीकहींकहीं
ख़महोगईहैगेसू-ए-दिलदारकीतरह
बे-तेशा-ए-नज़रचलोराह-ए-रफ़्तगाँ
हरनक़्श-ए-पाबुलंदहैदीवारकीतरह
अबजाकेकुछखुलाहुनर-ए-नाख़ून-ए-जुनूँ
ज़ख़्म-ए-जिगरहुएलब-ओ-रुख़्सारकीतरह
'मजरूह'लिखरहेहैंवोअहल-ए-वफ़ाकानाम
हमभीखड़ेहुएहैंगुनहगारकीतरह
  - Majrooh Sultanpuri
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