इन पत्थरों की ज़द से दरिया को डर नहीं है

  - Harsh Kumar Bhatnagar
इनपत्थरोंकीज़दसेदरियाकोडरनहींहै
थपकाहैइकज़रासाकोईज़ररनहींहै
इनआँधियोंकीजानिबकुछहीदिएजलाना
शाइरअभीनयाहैइतनाहुनरनहींहै
सबकुछतोकहदियाहैकुछभीनहींहैबाक़ी
फिरभीजोकुछबचाहैमुझकोख़बरनहींहै
सबकुछहीकरदियाहैमैंनेतिरेहवाले
बसतेरेदिलपेयाराकोईअसरनहींहै
कुछख़्वाबइकमिरादिलइकदोलिबासकेसाथ
घरसेनिकलचुकाहूँज़ाद-ए-सफ़रनहींहै
गाड़ीभीचुकीहैइकबारसोचलेफिर
गरतूसमझलेजानाँफिरकोईडरनहींहै
  - Harsh Kumar Bhatnagar
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