hai talab sehra ko samandar kii | है तलब सहरा को समुंदर की

  - Harsh Kumar Bhatnagar
हैतलबसहराकोसमुंदरकी
हैज़रूरतहवसकोपैकरकी
तूअकेलालड़ेगाभीकबतक
अबज़रूरतहैतुझकोलश्करकी
होचुकेआदीजुगनुओंकेहम
अबज़रूरतनहींहैजौहरकी
अबसज़ाभीक़ुबूलकरलेतू
बातछिड़नेलगीहैख़ंजरकी
रहाहूँमैंशहरमेंतेरे
गाड़ीमेंबैठाहूँजलंधरकी
ज़ख़्मभरनेलगामिराजबसे
चिट्ठीआईहैइकरफ़ूगरकी
  - Harsh Kumar Bhatnagar
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