kahaan the ham | कहाँ थे हम

  - Mahnaz Anjum
कहाँथेहम
समुंदरसीकिसीख़्वाहिशकेसाहिलपर
हँसतीभीगतीसाअ'तकीसंगतमें
हँसीकितनीसजलथी
आँखकेहरकुंजमें
तितलीकीसूरतउड़तीफिरतीथी
रह-ए-शबमेंघनाजंगल
याकोईअजनबीरस्ता
हमारेसामनेआता
तोउसदीवारकेसीनेसेकितनेदुरनिकलआए
लहूकीतालपरमंज़िल
धड़कउठतीथीपहलूमें
किसीएहसासकेधुँदले
उफ़ुक़सेदिननिकलआता
औरअपनेसाथक्याक्या
क़ुर्मुज़ीकिरनोंमेंलेटे
प्यारकेसन्देसलेआता
बहुततकरीमकेमौसम
तह-ए-जाँसेउभरतेथे
दु'आओंसेभरे
सरसब्ज़हाथोंकोयक़ींथा
झिलमिलातेख़्वाब
ख़ुशबू-ख़ेज़ियोंमेंफ़र्दहोंगे
औरतक़र्रुबकेकिसी
बेताबसेपलकोजगाएँगे
तोसरपटभागती
येउम्रकीहिरनी
किसीज़ंजीर-ए-वा'दामें
कहींरुककर
हमेंचाहतसेदेखेगी
कहाँहैंहम
किसीवीरानसाहिलपर
हमारीआरज़ूकीकश्तियाँ
औंधीपड़ीहैं
औरजैसेनींदके
बे-ताबहलकोरेकीज़दमेंहैं
अगरसूरजउन्हेंउसनींदसे
आज़ादकरनेकेलिए
किरनोंकोकोईइज़्नदेताहै
तोवोआँखोंपे
अपनेहाथरखलेतीहैं
गहरीनागवारीसे
औरअबतो
वस्लकीमिशअलभीख़्वाबीदाहै
सुलगनसेतहीहै
औरउसकेदश्तमें
हरसूबराबररेशमीख़्वाबोंकी
नीलीराखउड़तीहै
  - Mahnaz Anjum
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