bahut ladte ho tum | बहुत लड़ते हो तुम

  - Mahnaz Anjum
बहुतलड़तेहोतुम
मैंभीतुनुक-ताबीमें
ख़ासीफ़र्दहूँ
सोख़ूबजमतीहैबहमअपनी
मैंमुश्किलरास्तोंकीगर्द
पलकोंपरसँभालेआईहूँ
तुमतक
मिरेनज़दीककेहरमंतक़ेमें
तुमभी
अपनेबालोंकीचाँदीपेइतराते
परागंदामिज़ाजीमेंगुँधे
उखड़ेहुएतारोंकी
पगडंडीके
दिलमेंघूमतेहो
मोहब्बतकीभड़क
लफ़्ज़ोंमेंकम
आँखोंकीहलचलमें
ज़ियादालेकेफिरतीहूँ
मिरेनोकीलेलहजेकी
चुभनकेउसतरफ़दिलकी
बहुतहीरेशमीहदतक
तुम्हारीआँखजातीहै
तअ'ल्लुक़मेंरवादारीकानम
जानेकहाँसेआताहै
औरकेहमदोनोंकी
आवेज़िशकीसब
मुँह-ज़ोरियाँज़ंजीरकरताहै
सुनोसबगुफ़्तुगूकेसिलसिले
मेरीतुम्हारीख़ामुशीकी
भीगसेसरसब्ज़रहतेहैं
मिरीनज़्मोंकामरकज़
आजकेपलकी
सजलदुनियामेंबसतुमहो
तुम्हीसेबरसर-ए-पैकारहूँ
औरबे-तहाशामुल्तफ़ितभी
तुमतआरुज़केगुदाज़ोंमें
मुझेदेखो
मैंअपनेदिलकेतौसनको
बहुतसरपटभगाती
ख़ाककेतूफ़ाँजगाती
जिसगुलिस्ताँकीतमन्नाकी
डगरपरजारहीहूँ
उसकीहदपरतुम
उसकीहदपरतुम
कहींइकपेड़केपहलूमें
दिलबनकरधड़कतेहो
कहींफ़ितरतके
पेच-ओ-ताबमेंज़ंजीरहो
औरधूपकीयलग़ारमें
मेरेलिएछाँवका
इकना-मुख़्ततिमएहसासबनतेहो
बहुतहीदूरसेबस
तुमहीमुझकोसाफ़सुनतेहो
  - Mahnaz Anjum
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