koi bhooli hui soorat koi bisra hua KHvaab | कोई भूली हुई सूरत कोई बिसरा हुआ ख़्वाब

  - Mahmood Ayaz
कोईभूलीहुईसूरतकोईबिसराहुआख़्वाब
शबकेसन्नाटेमेंखुलनेलगेएहसासकेबाब
कोईनग़्मामिरीख़ामोशमोहब्बतकेरबाब
येउमीदोंकीकशाकशयेतमन्नाओंकेजाल
जानेकिसराहसेगुज़रेगीउमीदोंकीबरात
फ़ासलेबढ़तेगएशौक़-ए-सुबुक-गामकेसाथ
तूहीबोलमिरीमहरूमीकीबढ़तीहुईरात
कितनीदूरऔरहैवोशहर-ए-तरबख़ुल्द-ए-विसाल
कहाँढूँडूँतुझेसूरत-ए-ज़ेबा-ए-ख़याल
शबकीआग़ोशमेंख़्वाबीदाहैंबे-नूरअंजुम
शौक़केहाथमेंटूटेहुएपैमाना-ओ-ख़ुम
आरज़ूवक़्तकेफैलेहुएसहराओंमेंगुम
किनहिजाबातमेंरू-पोशहैसुब्ह-ए-जमाल
एकचोटएकख़लिशज़ौक़-ए-तजस्सुसकामआल
  - Mahmood Ayaz
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