majboori laachaari likh | मजबूरी लाचारी लिख

  - Mahendra Pratap Chand
मजबूरीलाचारीलिख
हाँरूदादहमारीलिख
ग़ैरोंकोइल्ज़ामदे
अपनोंकीअय्यारीलिख
सोचजोहल्कीहैतोक्या
ग़ज़लेंभारीभारीलिख
ऐबगिनवाऔरोंके
अपनीकार-गुज़ारीलिख
पहलेझूटेवादेकर
फिरअपनीलाचारीलिख
चाहेहक़ीक़तकुछभीहो
अपनापलड़ाभारीलिख
उजड़ेघरकेआँगनमें
हरी-भरीफुलवारीलिख
हरमंसबहरओहदेपर
अपनीदावेदारीलिख
'चाँद'कीख़सलतमेंयारब
कुछतोदुनियादारीलिख
  - Mahendra Pratap Chand
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