ham apne sar pe to suraj utha ke chalte hain | हम अपने सर पे तो सूरज उठा के चलते हैं

  - Mahboob Anwar
हमअपनेसरपेतोसूरजउठाकेचलतेहैं
सुनाहैबर्फ़केघरमेंभीलोगजलतेहैं
येकैसीरुतहैकिनेज़ोंपेसरउछलतेहैं
हमारेशहरकेबच्चोंकेदिलदहलतेहैं
जोरेडियमकेउजालेरुख़ोंपेमलतेहैं
वोअपनीज़ातसेबाहरनहींनिकलतेहैं
वोहमकिख़ारभीहमसेजुदानहींहोते
वोकैसेलोगहैंफूलोंकोभीमसलतेहैं
जोमुझपेगुज़रेहैंबीतेहैंजिनकोझेलाहै
वोहादसेमिरेजाम-ए-ग़ज़लमेंढलतेहैं
फ़लकसेआगबरसतीतोकोईबातथी
ज़मीनवालेज़मींपरहीज़ह्रउगलतेहैं
वोफ़स्ल-ए-गुलसहीयेख़िज़ाँसही'अनवर'
कभीतोकाग़ज़ीफूलोंकेदिनबदलतेहैं
  - Mahboob Anwar
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