ग़रीबोंकोफ़क़तउपदेशकीघुट्टीपिलातेहो
बड़ेआरामसेतुमचैनकीबंसीबजातेहो
हैमुश्किलदौरसूखीरोटियाँभीदूरहैंहमसे
मज़ेसेतुमकभीकाजूकभीकिशमिशचबातेहो
नज़रआतीनहींमुफ़्लिसकीआँखोंमेंतोख़ुश-हाली
कहाँतुमरात-दिनझूठेउन्हेंसपनेदिखातेहो
अँधेराकरकेबैठेहोहमारीज़िंदगानीमें
मगरअपनीहथेलीपरनयासूरजउगातेहो
व्यवस्थाकष्टकारीक्यूँँनहोकिरदारऐसाहै
येजनताजानतीहैसबकहाँतुमसरझुकातेहो