mahak mahak si gaii main gulaab ki soorat | महक महक सी गई मैं गुलाब की सूरत

  - Mah Jabeen Najm
महकमहकसीगईमैंगुलाबकीसूरत
वोबसगयामिरीआँखोंमेंख़्वाबकीसूरत
मैंरेत-रेतचलीआबलोंकेसाथयहाँ
जोज़िंदगीमिलीवोथीसराबकीसूरत
नसीबनेउसेशाहोंकीज़िंदगीदेदी
पड़ाथादरपेजोख़ाना-ख़राबकीसूरत
जिसेहैबैरमिरीइज़्ज़त-ओ-वक़ारसेवो
बनाकेआयाथाइज़्ज़त-मआबकीसूरत
ज़कातदेनेदिखावेकीक्याज़रूरतहै
गुनाहकरनेलगेहोसवाबकीसूरत
  - Mah Jabeen Najm
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