na the sha'ir hi kuchh bade ghalib | न थे शाइ'र ही कुछ बड़े ग़ालिब

  - Maftun Kotvi
थेशाइ'रहीकुछबड़ेग़ालिब
दिल-लगीमेंभीख़ूबथेग़ालिब
ख़ूबहँसतेहँसातेरहतेथे
बड़ीपुर-लुत्फ़बातकहतेथे
आमउनकोपसंदथेबेहद
या'नीरसियाथेआमकेबेहद
ख़ुदभीबाज़ारसेमंगातेथे
दोस्तभीआमउनकोभिजवाते
फिरभीआमोंसेजीभरताथा
आमकाशौक़उनकोइतनाथा
उनकेक़िस्सेतुम्हेंसुनाएँहम
उनकीबातोंसेकुछहँसाएँहम
एकमहफ़िलमेंवोभीबैठेथे
लोगआमोंकाज़िक्रकरतेथे
आमऐसाहोआमवैसाहो
पूछाग़ालिबसेआमकैसाहो
बोलेग़ालिबकिपूछतेहोअगर
सिर्फ़दोख़ूबियोंपेरखिएनज़र
बातपहलीयेहैकिमीठाहो
दूसरीबातयेबहुतसाहो
एकदिनदोस्तउनकेघरआए
आमग़ालिबनेथेबहुतखाए
सामनेघरकेथेपड़ेछिलके
उसगलीमेंसेकुछगधेगुज़रे
उनगधोंनेछिलकेवोखाए
सूँघकरउनकोबढ़गएआगे
दोस्तनेजबयेमाजरादेखा
सोचाग़ालिबकोअबहैसमझाना
दोस्तबोलेहैशयबुरीसीआम
देखोखातेनहींगधेभीआम
हँसकेग़ालिबयेदोस्तसेबोले
जीहाँबे-शकगधेनहींखाते
बादशहकररहेथेसैर-ए-बाग़
ख़ुशथाआमोंसेउनकाक़ल्ब-ओ-दिमाग़
बादशहकेथेसाथग़ालिबभी
डालतेथेनज़रवोललचाई
जीमेंयेथाकिख़ूबखाएँआम
बादशहसेजोआजपाएँआम
घूरतेथेजोग़ालिबआमोंको
बादशहबोलेघूरतेक्याहो
बादशहसेयेबोलेवोहँसकर
मुहरहोतीहैदानेदानेपर
देखताहूँयूँँघूरकरमैंआम
शायदउनपरलिखाहोमेरानाम
मक़्सदउनकाजोबादशहपाए
फिरबहुतआमउनकोभिजवाए
  - Maftun Kotvi
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