hai hijr faila hua aur raushni kam hai | है हिज्र फैला हुआ और रौशनी कम है

  - M. Usman Shakir
हैहिज्रफैलाहुआऔररौशनीकमहै
मोहब्बतोंकेलिएएकज़िंदगीकमहै
तिराविसालअलामतहैमेरेजीनेकी
औरअबकेजीनेकीउम्मीदऔरभीकमहै
वोफ़िराक़नफ़रतइंतिहा-ए-ग़म
मिरीहयातमेंहरएकतीरगीकमहै
तुमअपनीनीमसीआँखोंसेहीपिलाडालो
मिरेलबोंपेपियालोंकीतिश्नगीकमहै
मिरेमिज़ाजसेमिलतानहींहैतेरामिज़ाज
तिरेमिज़ाजमेंशायदकिआशिक़ीकमहै
अजीबबदलाहुआलगरहाहैवो'शाकिर'
औरउसकेलहजेमेंभीअबकिबे-रुख़ीकमहै
  - M. Usman Shakir
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