andhiyaare aankh-aankh men pahna gaii hai shaam | अँधियारे आँख-आँख में पहना गई है शाम

  - M. I. Sajid
अँधियारेआँख-आँखमेंपहनागईहैशाम
इकचादर-ए-सियाहकोफैलागईहैशाम
राहोंमेंखोगईहैंमोहब्बतकीदेवियाँ
जैसेहरएकमोड़पेबहकागईहैशाम
मग़रिबकीसम्तजबकभीसूरजउतरगया
घरमेंदियाजलानेचलीगईहैशाम
सम्तोंमेंबटगएहैंउजालोंकेहम-नवा
बे-सम्तदेखकरमुझेसहरागईहैशाम
जिससम्तदेखताहूँशुआ'ओंकेज़ख़्महैं
किसकीनिगाह-ए-नाज़सेटकरागईहैशाम
अपनेवजूदसेमैंबिछड़करभटकगया
तन्हाइयोंकेज़ख़्मसेमहकागईहैशाम
शहरोंकेआसमाँपेपरिंदोंकाशोरहै
मंज़रकोईहसीनसादिखलागईहैशाम
बरसोंसेचलरहीथीयेमौसमकेसाथसाथ
मेरीगलीमेंआनकेसुस्तागईहैशाम
'साजिद'उठोयहाँसेकिमौसमउदासहै
सूरजबिछड़गयाहैचलोगईहैशाम
  - M. I. Sajid
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