kabhi aañkhen kabhi rukhsaar-o-zakkan nochti hai | कभी आँखें कभी रुख़्सार-ओ-ज़क़न नोचती है

  - Lucky farooqi Hasrat
कभीआँखेंकभीरुख़्सार-ओ-ज़क़ननोचतीहै
अबमिरीरूहफ़क़तमेराबदननोचतीहै
सुब्हकीचायमेंहोतीहैवोतासीरग़ज़ब
जोगईरातकेचेहरेसेथकननोचतीहै
अपनीमर्ज़ीसेतवाइफ़नहींबनतीऔरत
मुफ़्लिसीभूककीजानिबसेबदननोचतीहै
बाहमीरब्तकेजल्वेभीअजबहोतेहैं
मैंघुटनकोतोकभीमुझकोघुटननोचतीहै
लोगकहतेथेग़रीबीजिसेसदियोंपहले
वोबलाआजभीलाशोंकेकफ़ननोचतीहै
गरअलावातिरेआताहैकिसीऔरकाख़्वाब
रातभरआँखकीपुतलीकोचुभननोचतीहै
  - Lucky farooqi Hasrat
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