कभीआँखेंकभीरुख़्सार-ओ-ज़क़ननोचतीहै
अबमिरीरूहफ़क़तमेराबदननोचतीहै
सुब्हकीचायमेंहोतीहैवोतासीरग़ज़ब
जोगईरातकेचेहरेसेथकननोचतीहै
अपनीमर्ज़ीसेतवाइफ़नहींबनतीऔरत
मुफ़्लिसीभूककीजानिबसेबदननोचतीहै
बाहमीरब्तकेजल्वेभीअजबहोतेहैं
मैंघुटनकोतोकभीमुझकोघुटननोचतीहै
लोगकहतेथेग़रीबीजिसेसदियोंपहले
वोबलाआजभीलाशोंकेकफ़ननोचतीहै
गरअलावातिरेआताहैकिसीऔरकाख़्वाब
रातभरआँखकीपुतलीकोचुभननोचतीहै