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Kushal "PARINDA"
kama luun kaise bhi daulat magar mujhko yaqeen hai ye
kama luun kaise bhi daulat magar mujhko yaqeen hai ye | कमा लूँ कैसे भी दौलत मगर मुझको यक़ीं है ये
- Kushal "PARINDA"
कमा
लूँ
कैसे
भी
दौलत
मगर
मुझको
यक़ीं
है
ये
मेरे
बीते
हुए
कल
का
सिला
देगी
यही
दुनिया
- Kushal "PARINDA"
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मैं
जब
सो
जाऊँ
इन
आँखों
पे
अपने
होंट
रख
देना
यक़ीं
आ
जाएगा
पलकों
तले
भी
दिल
धड़कता
है
Bashir Badr
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यक़ीन
उसने
दोबारा
बना
लिया
लेकिन
वो
मेरे
ज़ेहन
से
धोखा
नहीं
निकाल
सका
Vikram Gaur Vairagi
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जहाँ
तक
मुझ
सेे
मतलब
है
जहाँ
को
वही
तक
मुझको
पूछा
जा
रहा
है
ज़माने
पर
भरोसा
करने
वालों
भरोसे
का
ज़माना
जा
रहा
है
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Naeem Akhtar Khadimi
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झूट
पर
उसके
भरोसा
कर
लिया
धूप
इतनी
थी
कि
साया
कर
लिया
Shariq Kaifi
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यक़ीन
कर
वो
तिरे
पास
लौट
आएगा
जब
उस
का
उठने
लगेगा
यक़ीन
लोगों
से
Varun Anand
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दिल
को
तेरी
चाहत
पे
भरोसा
भी
बहुत
है
और
तुझ
से
बिछड़
जाने
का
डर
भी
नहीं
जाता
Ahmad Faraz
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भरोसा
तोड़कर
अच्छा
किया
तुमने
मैं
दुनिया
पर
भरोसा
करने
वाला
था
Aatish Alok
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शायद
मुझे
किसी
से
मोहब्बत
नहीं
हुई
लेकिन
यक़ीन
सब
को
दिलाता
रहा
हूँ
मैं
Jaun Elia
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तुम्हारी
ख़ानदानी
रस्म
रस्म-ए-बेवफ़ाई
है
हमीं
पागल
थे
जो
तुम
पर
भरोसा
कर
लिया
हमने
Shajar Abbas
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उसी
का
शहर
वही
मुद्दई
वही
मुंसिफ़
हमें
यक़ीं
था
हमारा
क़ुसूर
निकलेगा
Ameer Qazalbash
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वो
तुम
सेे
दूर
कैसा
है
ये
तुम
भी
सोच
कर
देखो
मिलेगा
ख़ाब
में
तुमको
जो
आँखें
मीच
कर
देखो
Kushal "PARINDA"
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किसी
को
सोच
ने
मारा
किसी
को
डर
ने
मारा
है
किसी
को
मिल
गई
दौलत
किसी
को
ज़र
ने
मारा
है
Kushal "PARINDA"
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कहीं
पर
दूर
दरिया
के
किनारों
पर
खड़े
हैं
हम
तेरे
दिल
से
निकाले
दर-बदर
होकर
खड़े
हैं
हम
मुझे
तुम
सेे
मोहब्बत
है
इधर
देखो
ना
तुम
जाना
तुझे
पाने
की
ख़ातिर
हर
जगह
मिटकर
खड़े
हैं
हम
बड़े-बूढ़ों
ने
जब
पूछा
नगर
कैसे
जवाँ
है
ये
कहा
हमने
लुटाकर
गाँव
जो
डटकर
खड़े
हैं
हम
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Kushal "PARINDA"
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मुझे
तो
ये
ज़माना
मानता
है
मगर
तू
बस
ठिकाना
मानता
है
जकड़
ले
गर
हमें
पहलू
में
कोई
तो
ये
समझो
ख़ज़ाना
मानता
है
मेरी
धड़कन
में
बसते
हैं
जो
लम्हे
उन्हें
दिल
आशियाना
मानता
है
तेरी
चुप
में
भी
इक
आवाज़
है
जो
उसे
रूहों
का
गाना
मानता
है
मैं
जब
भी
ज़िक्र
करता
हूँ
तेरा
नाम
वो
सज्दा
भी
बहाना
मानता
है
नज़र
जो
तुझ
पे
ठहरी
है
सदास
उसे
ये
आब-ए-दाना
मानता
है
तुझे
सोचूँ
तो
सब
कुछ
रौशनी
है
अँधेरा
भी
उजाला
मानता
है
'परिंदा'
अब
भी
तेरे
दर
पे
झुका
है
उसे
ये
सिर
झुकाना
मानता
है
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Kushal "PARINDA"
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लिखा
क़िस्मत
में
जो
उसने
वही
बस
हक़
से
पाया
है
न
पाया
हक़
से
गर
होगा
बला
देगी
यही
दुनिया
Kushal "PARINDA"
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