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Kush Pandey ' Saarang '
haya gehna hai aurat ke badan ka
haya gehna hai aurat ke badan ka | हया गहना है औरत के बदन का
- Kush Pandey ' Saarang '
हया
गहना
है
औरत
के
बदन
का
वो
मतलब
जानती
है
हर
छुअन
का
- Kush Pandey ' Saarang '
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सब
ने
माना
मरने
वाला
दहशत-गर्द
और
क़ातिल
था
माँ
ने
फिर
भी
क़ब्र
पे
उस
की
राज-दुलारा
लिक्खा
था
Ahmad Salman
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मुझ
को
ये
आरज़ू
वो
उठाएँ
नक़ाब
ख़ुद
उन
को
ये
इंतिज़ार
तक़ाज़ा
करे
कोई
Asrar Ul Haq Majaz
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हया
से
सर
झुका
लेना
अदास
मुस्कुरा
देना
हसीनों
को
भी
कितना
सहल
है
बिजली
गिरा
देना
Akbar Allahabadi
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तुझको
बतलाता
मगर
शर्म
बहुत
आती
है
तेरी
तस्वीर
से
जो
काम
लिया
जाता
है
Tehzeeb Hafi
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तू
ने
ये
क्या
ग़ज़ब
किया
मुझ
को
भी
फ़ाश
कर
दिया
मैं
ही
तो
एक
राज़
था
सीना-ए-काएनात
में
Allama Iqbal
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अल्लाह
अल्लाह
हुस्न
की
ये
पर्दा-दारी
देखिए
भेद
जिस
ने
खोलना
चाहा
वो
दीवाना
हुआ
Arzoo Lakhnavi
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है
देखने
वालों
को
सँभलने
का
इशारा
थोड़ी
सी
नक़ाब
आज
वो
सरकाए
हुए
हैं
Arsh Malsiyani
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पहले
तो
मेरी
याद
से
आई
हया
उन्हें
फिर
आइने
में
चूम
लिया
अपने-आप
को
Shakeb Jalali
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इक
तो
ये
नूर
उस
पे
मेरी
शर्म
भी
अलग
तू
सामने
रहा
तो
निगह
उठ
न
पाएगी
shaan manral
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इतनी
जल्दी
न
गिरा
अपने
हसीं
रुख़
पे
नक़ाब
तू
मुझे
ठीक
से
हैरान
तो
हो
लेने
दे
Rajesh Reddy
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विरह
पे
मौन
हो
जाती
हैं
उन
सबकी
ज़बानें
जो
हर
कविता
मिलन
पे
वार
देते
हैं
यहाँ
पे
Kush Pandey ' Saarang '
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ये
भी
कैसी
मजबूरी
है
दोनों
के
बीच
में
दूरी
है
तय
है
उसका
नेता
बनना
जिसके
हाथ
में
छूरी
है
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Kush Pandey ' Saarang '
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इक
काली
रात
के
जैसा
मैं
वो
सुब्ह
के
जैसी
नूरी
है
मुझको
पढ़
लेती
हो
छुपकर
बस
ये
असली
मशहूरी
है
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Kush Pandey ' Saarang '
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तड़प
कर
क्या
मिला
है
प्यार
में
दु:खी
तुम
हो,
गए
बेकार
में
यही
समझा
है
दोनों
ने
अभी
ख़ुशी
दोनों
की
है
इंकार
में
मुनाफ़ा
है
कहीं
नुकसान
है
लगा
रहता
है
ये
व्यापार
में
मोहब्बत
में
यही
लगता
रहा
हमारी
जीत
है
इस
हार
में
मेरा
तो
हमकदम
कोई
नहीं
मैं
चलता
हूँ
बड़ी
रफ़्तार
में
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पर्दादारी
ठीक
है
लेकिन
झूठ
पे
पर्दे
मत
डालो
दोस्त
बना
लो
दुनिया
को
पर
दुश्मन
ज़्यादा
मत
पालो
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