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Kush Pandey ' Saarang '
bala ki khoobsurat ho ye maana
bala ki khoobsurat ho ye maana | बला की ख़ूब-सूरत हो ये माना
- Kush Pandey ' Saarang '
बला
की
ख़ूब-सूरत
हो
ये
माना
मगर
सीरत
से
तुम
कमतर
हो
मानो
मैं
दुनियावी
नजर
से
कह
रहा
हूँ
किसी
से
तुम
यहाँ
बेहतर
हो
मानो
- Kush Pandey ' Saarang '
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मैं
कहाँ
जाऊँ
करूँँ
किस
से
शिकायत
उस
की
हर
तरफ़
उस
के
तरफ़-दार
नज़र
आते
हैं।
Zubair Ali Tabish
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न
कोई
बीन
बजाई
न
टोकरी
खोली
बस
एक
फोन
मिलाने
पे
साँप
बैठा
है
कोई
भी
लड़की
अकेली
नज़र
नहीं
आती
यहाँ
हर
एक
ख़जाने
पे
साँप
बैठा
है
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Muzdum Khan
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यूँँ
तो
वो
शख़्स
बिलकुल
बे-गुनह
है
ज़माने
की
मगर
उस
पे
निगह
है
हमारे
दरमियाँ
जो
दूरियाँ
हैं
यक़ीनन
तीसरी
कोई
वजह
है
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Dileep Kumar
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कभी
ज़िन्दगी
से
यूँँ
न
चुराया
करो
नज़र
कि
मौजूद
भी
रहो
तो
न
आया
करो
नज़र
S M Afzal Imam
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बोसा
देते
नहीं
और
दिल
पे
है
हर
लहज़ा
निगाह
जी
में
कहते
हैं
कि
मुफ़्त
आए
तो
माल
अच्छा
है
Mirza Ghalib
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लौट
जाती
है
उधर
को
भी
नज़र
क्या
कीजे
अब
भी
दिलकश
है
तेरा
हुस्न
मगर
क्या
कीजे
Faiz Ahmad Faiz
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हुस्न
को
भी
कहाँ
नसीब
'जिगर'
वो
जो
इक
शय
मिरी
निगाह
में
है
Jigar Moradabadi
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सखी
को
हमारी
नज़र
लग
न
जाए
उसे
ख़्वाब
में
रात
भर
देखते
हैं
Sahil Verma
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कम
अज़
कम
इक
ज़माना
चाहता
हूँ
कि
तुम
को
भूल
जाना
चाहता
हूँ
ख़ुदारा
मुझ
को
तन्हा
छोड़
दीजे
मैं
खुल
कर
मुस्कुराना
चाहता
हूँ
सरासर
आप
हूँ
मद्दे
मुक़ाबिल
ख़ुदी
ख़ुद
को
हराना
चाहता
हूँ
मेरे
हक़
में
उरूस-ए-शब
है
मक़्तल
सो
उस
से
लब
मिलाना
चाहता
हूँ
ये
आलम
है,
कि
अपने
ही
लहू
में
सरासर
डूब
जाना
चाहता
हूँ
सुना
है
तोड़ते
हो
दिल
सभों
का
सो
तुम
से
दिल
लगाना
चाहता
हूँ
उसी
बज़्म-ए-तरब
की
आरज़ू
है
वही
मंज़र
पुराना
चाहता
हूँ
नज़र
से
तीर
फैंको
हो,
सो
मैं
भी
जिगर
पर
तीर
खाना
चाहता
हूँ
चराग़ों
को
पयाम-ए-ख़ामुशी
दे
तेरे
नज़दीक
आना
चाहता
हूँ
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Kazim Rizvi
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जो
बिस्मिल
बना
दे
वो
क़ातिल
तबस्सुम
जो
क़ातिल
बना
दे
वो
दिलकश
नज़ारा
मोहब्बत
का
भी
खेल
नाज़ुक
है
कितना
नज़र
मिल
गई
आप
जीते
मैं
हारा
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Nushur Wahidi
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तड़प
कर
क्या
मिला
है
प्यार
में
दु:खी
तुम
हो,
गए
बेकार
में
यही
समझा
है
दोनों
ने
अभी
ख़ुशी
दोनों
की
है
इंकार
में
मुनाफ़ा
है
कहीं
नुकसान
है
लगा
रहता
है
ये
व्यापार
में
मोहब्बत
में
यही
लगता
रहा
हमारी
जीत
है
इस
हार
में
मेरा
तो
हमकदम
कोई
नहीं
मैं
चलता
हूँ
बड़ी
रफ़्तार
में
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Kush Pandey ' Saarang '
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ज़माने
से
जुदा
लगते
हुए
हम
मिलेंगे
आप
से
हँसते
हुए
हम
हमारे
सामने
से
ही
गया
वो
खड़े
थे
हाथ
को
मलते
हुए
हम
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Kush Pandey ' Saarang '
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दिलों
पे
दस्तख़त
करते
हुए
हम
चले
जाएँगे
बस
हँसते
हुए
हम
Kush Pandey ' Saarang '
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ज़ुबाँ
में
चाशनी
रखने
लगे
हम
यही
दस्तूर
है
दुनिया
का
साहब
Kush Pandey ' Saarang '
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दुआएँ
काम
आती
हैं
दु'आ
लेते
चलो
सब
की
बलाएँ
दूर
रहती
हैं
नज़र
हो
जो
कहीं
रब
की
Kush Pandey ' Saarang '
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