kaaghaz par kuchh bhi likh aaya karta tha | काग़ज़ पर कुछ भी लिख आया करता था

  - KUNAL
काग़ज़परकुछभीलिखआयाकरताथा
नज़्मग़ज़लसाकुछबनजायाकरताथा
उल्टेसीधेशब्दअड़ायाकरताथा
फिरमैंउसमेंबहरफँसायाकरताथा
रिक्तस्थानग़ज़लकेभरनेकोफिरमैं
पत्थररोड़ेईंटलगायाकरताथा
बिंत-ए-ग़ज़लतबजानछिड़कतीथीमुझपर
मैंउसकेप्रतिबंधहटायाकरताथा
भगाउसेमीनार-ए-रिवायतसेफिरमैं
नएनएज़ाविएदिखायाकरताथा
हुस्नअदबनाज़ुकीभुलाकरउससेमैं
नौसेपाँचकेकामकरायाकरताथा
  - KUNAL
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