bastii bastii khaak udaaye bas vehshat ka maara ho | बस्ती बस्ती ख़ाक उड़ाये, बस वहशत का मारा हो

  - Daagh Aligarhi
बस्तीबस्तीख़ाकउड़ाये,बसवहशतकामाराहो
उससेेइश्क़कीआसकरनाजिसकामनबंजाराहो
सारेतारोंकीनीयतमेंएकहीपहलूठहराहै
चाहेक़ीमतकोईभीहो,लेकिनचाँदहमाराहो
क़तराक़तरारोनाभीक्याहिज्रकेमौसमकारोना?
चश्मे-तरमम्बाहोजाएमू-ए-मिज़ाफव्वाराहो
बचपनकीभीख़्वाहिशदेखोतकतेरहतेथेअंबर?
ख़्वाबोंकीहसरतथीसैरकोपरियोंकासय्याराहो
इतनाकहकरछोड़आयामैंउसकेकूचेकोपरसों
जामेरादिलतोड़नेवाले,तुझकोइश्क़दुबाराहो
यारसियासीतलवारोंकोपीनाहैहररोज़लहू
चाहेलाशलाशबिछेंयाख़ूँसेतरगहवाराहो
ख़ुदकोशाइरकहतेरहनादिलकोलाखसुकूँदेदे
लेकिनदुनियाकीनज़रोंमेंतुमअबभीआवाराहो
  - Daagh Aligarhi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy