apne hisse ka agar baadal bhi paata | अपने हिस्से का अगर बादल भी पाता

  - Krishnakant Kabk
अपनेहिस्सेकाअगरबादलभीपाता
इश्क़कापौधाहमारापलभीपाता
रोज़ख़्वाबोंमेंमुझेदिखतातेराघर
काशनींदोंमेंकभीमैंचलभीपाता
आजपाईहैमोहब्बतजितनीमैंने
काशमैंउतनीमोहब्बतकलभीपाता
जलरहाहूँरोज़सूरजकीतरहमैं
काशथोड़ीदेरकोमैंढलभीपाता
बीजबोकरप्यारकाक्यूँहारमानी
सब्रकरतातूअगरतोफलभीपाता
  - Krishnakant Kabk
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