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Kinshu Sinha
aisa thodii tha ki mujhko gham na tha
aisa thodii tha ki mujhko gham na tha | ऐसा थोड़ी था कि मुझको ग़म न था
- Kinshu Sinha
ऐसा
थोड़ी
था
कि
मुझको
ग़म
न
था
ग़म
था
पर
उस
ग़म
का
तू
मरहम
न
था
इश्क़
था
तो
क्यूँ
तेरी
हर
बात
में
सिर्फ़
मैं
ही
मैं
था
कोई
हम
न
था
ठीक
है
मसरूफ़
था
तू
और
कहीं
पर
मैं
भी
दीवाना
तेरा
कम
न
था
तेरा
दिल
रखना
था
सो
जाने
दिया
ये
न
समझो
रोकने
का
दम
न
था
क्यूँ
न
करता
इश्क़
में
समझौते
मैं
मैं
किसी
दिल
के
लिए
परचम
न
था
मैंने
तुझ
में
झाँका
था
हिजरत
के
बाद
तेरे
दिल
में
दर्द
का
मौसम
न
था
अब
मैं
समझा
क्यूँ
दग़ा
मिलता
रहा
मुझ
में
ही
ख़म
थे
किसी
में
ख़म
न
था
- Kinshu Sinha
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अपना
ही
एक
मौसम
लिए
फिरते
हैं
लोग
जो
दिल
को
पुर-ग़म
लिए
फिरते
हैं
चारा-गर
जैसे
हैं
ये
सुख़न-वर
सभी
सबके
ज़ख़्मों
का
मरहम
लिए
फिरते
हैं
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Dileep Kumar
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तू
किसी
और
ही
दुनिया
में
मिली
थी
मुझ
सेे
तू
किसी
और
ही
मौसम
की
महक
लाई
थी
डर
रहा
था
कि
कहीं
ज़ख़्म
न
भर
जाएँ
मेरे
और
तू
मुट्ठियाँ
भर-भर
के
नमक
लाई
थी
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Tehzeeb Hafi
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ज़रा
मौसम
तो
बदला
है
मगर
पेड़ों
की
शाख़ों
पर
नए
पत्तों
के
आने
में
अभी
कुछ
दिन
लगेंगे
बहुत
से
ज़र्द
चेहरों
पर
ग़ुबार-ए-ग़म
है
कम
बे-शक
पर
उन
को
मुस्कुराने
में
अभी
कुछ
दिन
लगेंगे
Javed Akhtar
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मेहरबाँ
हम
पे
हर
इक
रात
हुआ
करती
थी
आँख
लगते
ही
मुलाक़ात
हुआ
करती
थी
हिज्र
की
रात
है
और
आँख
में
आँसू
भी
नहीं
ऐसे
मौसम
में
तो
बरसात
हुआ
करती
थी
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Ismail Raaz
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बैठे
बैठे
फेंक
दिया
है
आतिश-दान
में
क्या
क्या
कुछ
मौसम
इतना
सर्द
नहीं
था
जितनी
आग
जला
ली
है
Zulfiqar aadil
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वो
आग
बुझी
तो
हमें
मौसम
ने
झिंझोड़ा
वर्ना
यही
लगता
था
कि
सर्दी
नहीं
आई
Khurram Afaq
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तन्हा
होना,
गुमसुम
दिखना,
कुछ
ना
कहना...
ठीक
नहीं
अपने
ग़म
को
इतना
सहना,
इतना
सहना...
ठीक
नहीं
आओ
दिल
की
मिट्टी
में
कुछ
दिल
की
बातें
बो
दें
हम
बारिश
के
मौसम
में
गमले
ख़ाली
रहना...
ठीक
नहीं
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Dev Niranjan
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कभी
क़रीब
कभी
दूर
हो
के
रोते
हैं
मोहब्बतों
के
भी
मौसम
अजीब
होते
हैं
Azhar Inayati
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हमारा
काम
तो
मौसम
का
ध्यान
करना
है
और
उस
के
बाद
के
सब
काम
शश-जहात
के
हैं
Pallav Mishra
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जैसा
मूड
हो
वैसा
मंज़र
होता
है
मौसम
तो
इंसान
के
अंदर
होता
है
Aziz Ejaaz
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इस
नए
दिन
पर
पुराना
दर्द
क्यूँ
हो
चल
नई
सी
ठोकरें
खाएँ
कहीं
पर
Kinshu Sinha
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ये
लड़की
कब
से
मेरी
बाहों
में
रो
रही
है
अच्छा
तो
लग
रहा
है
पर
देर
हो
रही
है
ये
जानती
है
मुझको
इक
तोहफ़ा
चाहिए
था
सो
आँसुओं
से
मेरी
कॉलर
भिगो
रही
है
वो
साथ
रहने
का
वा'दा
यूँँ
निभा
रही
है
इस
शर्ट
में
दुपट्टा
अपना
पिरो
रही
है
अब
सारे
काम
तो
मुझको
टालने
ही
होंगे
अब
ये
सुकूँ
से
मेरी
बाहों
में
सो
रही
है
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Kinshu Sinha
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कमज़ोर
कर
रहा
था
मुहब्बत
को
शक
मेरा
शक
को
मेरे
यक़ीं
में
बदलने
का
शुक्रिया
Kinshu Sinha
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चलते
हो
मेरी
राह
क्या
होना
ही
है
तबाह
क्या
हमको
जो
देखे
तक
नहीं
करनी
उधर
निगाह
क्या
तय
कर
लिया
तो
कर
लिया
लेनी
कोई
सलाह
क्या
पीते
तो
सब
हैं
दर्द
में
हमने
किया
गुनाह
क्या
हम
‛आह’
सुनने
वालों
को
मिल
जाती
है
पनाह
क्या
समझे
नहीं
जो
शे'र
तो
करते
हो
वाह
वाह
क्या
दुनिया
से
लड़ने
कहती
हो
कर
लोगी
तुम
निक़ाह
क्या
अब
जो
किया,
सही
किया
इल्ज़ाम
क्या,
गवाह
क्या
महताब
है
चमक
रहा
अब
होगी
और
सबाह
क्या
ये
देखो
ज़िन्दगी
मेरी
कुछ
इस
सेे
है
सियाह
क्या
होना
है
बस
ज़लील
‛किंशु’
होगी
कुछ
और
चाह
क्या
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Kinshu Sinha
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साथ
रहकर
भी
अजनबी
थे
हम
सच
में
!
पागल
ही
आदमी
थे
हम
Kinshu Sinha
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